मानसी शर्मा / – बिहार में सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। राजनीतिक पंडित बिहार की राजनीति में कभी भी सियासी समीकरण बदलने की संभावना जता रहे हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी इस खबर पर अपनी सहमति दे दी है। गणतंत्र दिवस के दिन ही पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत देकर सियासी आग को और भड़का दिया है।
मांझी ने दिए बदलाव के संकेत
राज्य में बदलाव का संकेत देते हुए एनडीए के सहयोगी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा है। राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि मांझी ने भले ही कम शब्द लिखे हैं, लेकिन उन्होंने बड़े संकेत दिए हैं। आपको बता दें कि इससे पहले शुक्रवार रात केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी मांझी के आवास पहुंचे और उनसे मुलाकात की।
परिवारवाद पर साधा निशाना
गौरतलब है कि मांझी ने खुद कुछ दिन पहले 25 जनवरी को एक्स पर राज्य में ‘खेला खेला’ होने की बात लिखी थी, जिसके बाद से राज्य में सियासी घमासान तेज हो गया है। इधर, शुक्रवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए मांझी ने कहा कि अपनी सरकार के उपमुख्यमंत्री और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव की मौजूदगी में नीतीश कुमार खुले मंच से 2005 से पहले की लालू-राबड़ी सरकार के जंगलराज की याद दिलाते रहते हैं। आप इस बात से समझ सकते हैं कि सीएम ने कर्पूरी जयंती समारोह में भी भाई-भतीजावाद पर निशाना साधा था।
विरोध नहीं करेंगे मांझी
उन्होंने यह भी कहा कि वह नीतीश के एनडीए में शामिल होने का विरोध नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस पर फैसला बीजेपी को लेना है। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के लिए केंद्र सरकार की सराहना भी की।


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