आयुर्वेद में है अनेकों रोगों को ठीक करने की क्षमता -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

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आयुर्वेद में है अनेकों रोगों को ठीक करने की क्षमता -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में आयुर्वेद से शुगर व बी पी के उपचार पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया ।यह कोरोना काल मे 52वां ऑनलाइन वेबिनार था।
गायत्री मंत्र व ईश्वर भक्ति के भजन के माध्यम से आचार्य महेन्द्र भाई ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्या डॉ सुषमा आर्या ने कहा कि शुगर एवं उच्च रक्तचाप दोनों ही शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। जहां शुगर में किडनी, आंखें एवं पांवों को खतरा होता है, वहीं उच्च रक्तचाप में हृदय, दिमाग आदि को खतरा होता है।एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ाएं,आयुर्वेद में हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए सबसे अच्छी दवा हैं दालचीनी, इसका प्रयोग मसाले के रूप में भी किया जाता हैं. दालचीनी केवल इंसान को दिल की बीमारियों से ही नहीं बल्कि शुगर से भी बचाता हैं. इसके प्रयोग से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बढ़ जाती हैं और ब्लड शुगर को कम किया जा सकता है। आपको प्रतिदिन सुबह खाली पेट आधा चम्मच दालचीनी के पाउडर के साथ शहद मिलाकर लेना हैं और फिर ऊपर से गर्म पानी पी लें।साथ ही उन्होंने शरीर की कार्यविधि व आयुर्वेद में शरीर को किस प्रकार स्वस्थ रखा जा सकता है इस ओर भी प्रकाश डाला।कई छोटी छोटी आदतों को दिनचर्या में अपनाने ,पानी के नियमित सेवन व आसानी से रसोई में मिलने वाली सामग्री के प्रयोगों से अनेकों रोगों का उपचार किस प्रकार किया जा सकता है उस पर भी चर्चा की।
परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आयुर्वेदीय चिकित्सा विधि सर्वांगीण है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के उपरान्त व्यक्ति का शारीरिक तथा मानसिक दोनों प्रकार से सुधार होता है।आयुर्वेदिक औषधियों के अधिकांश घटक जड़ी-बूटियों, पौधों, फूलों एवं फलों आदि से प्राप्त की जातीं हैं इसलिए यह चिकित्सा प्रकृति के निकट है।प्रकृति में इस शरीर को बनाने के साथ इसे ठीक करने की क्षमता भी है। योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने गोष्ठी का संचालन करते हुए जानकारी दी कि जीवन शैली को निम्न नियमों में संशोधित किया जा सकता है रू- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठें स प्रातः गर्म पानी का सेवन करें। इसके सेवन से पूर्व दिन में इकट्ठे हुए विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। नित्य कार्यों से निव्रत होकर कम से कम 45 मिनट तक योग व प्राणायाम अवश्य करने पर निश्चित ही अनेक प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है। प्रान्तीय महामंत्री प्रवीन आर्य ने बताया कि आयुर्वेद न केवल रोगों की चिकित्सा करता है बल्कि रोगों को रोकता भी है। आयुर्वेद भोजन तथा जीवनशैली में सरल परिवर्तनों के द्वारा रोगों को दूर रखने के उपाय सुझाता है। आयुर्वेदिक औषधियाँ स्वस्थ लोगों के लिए भी उपयोगी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद राजरानी अग्रवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया और साथ हीं इस प्रकार के कार्यक्रम को अधिक से अधिक करने की प्रेरणा दी। श्रीमति प्रवीन आर्या,नरेन्द्र आर्यश्सुमनश् ,संगीता आर्या, पुष्पा चुघ, राजश्री यादव आदि ने मधुर गीत सुनाये। प्रमुख रूप से यशोवीर आर्य, वीना वोहरा, आनन्द प्रकाश आर्य(हापुड़) , अभिमन्यु चावला, के एल राणा, देवेन्द्र भगत,अनिता आर्य,देवेन्द्र गुप्ता, ओम सपरा,सुरेन्द्र शास्त्री,गीता गर्ग आदि उपस्थित थे।

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