नई एल्बम मन को लेकर अरूण बख्शी ने की मन की बात, मन से काफी उम्मीदे

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
September 22, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नई एल्बम मन को लेकर अरूण बख्शी ने की मन की बात, मन से काफी उम्मीदे

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- पंजाबी सूफी गायक, लोक कलाकार, बाॅलीबुड अभिनेता व संगीतकार अरूण बख्शी को आज कौन नही जानता और न ही वह किसी पहचान के मोहताज है। उनका प्रेम के विरह गीतो, मिलन की आहत-चाहत पर जो बेबाक चित्रण वह करते है यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। आज गायक-अभिनेता अरुण बख्शी ने अपनी नई एलबम मन के रिलीज होने के मौके पर नजफगढ़ मैट्रो के पत्रकार व कवि कृष्ण गोपाल विद्यार्थी से मन की बात की।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रख्यात अभिनेता,गायक, संगीतकार अरुण बख्शी ने इस विधा में भी उन बुलंदियों को छुआ है जो अनेक कलाकारों के लिए किसी सपने जैसा ही है। इस क्षेत्र में उन्होंने एक नया मुकाम हासिल किया है और इजहारे इश्क को एक नया अंदाज दिया है। सूफी पंजाबी लोक गीत संगीत की दुनिया में जो नाम आज आसमान की ऊँचाईयां छू रहा है, वह नाम अरुण बख्शी का ही है। उनके तीन ही म्यूजिक वीडियो रिलीज हुए हैं जिनकी अपार सफलता ने नये कीर्तिमान स्थापित कर उनके प्रशंसकों सहित करोड़ों संगीतप्रेमियों को उनका दीवाना बना दिया है। अरुण बख्शी का नया एलबम मन अपने नाम के अनुरूप श्रोताओं के दिल की गहराई में उतरकर उनकी हृदय वीणा के तार झंकृत करने में सक्षम है। मन शीर्षक से वीनस म्यूजिक कंपनी द्वारा जारी इस भावपूर्ण सूफी गीत का मुखड़ा है —
मन अट्केया बेपरवा दे नाल,
असां साह लैणा ओह्दे साह दे नाल !
इस गीत को लिखा है अरुण जी के अभिन्न मित्र रहे मदन पाल ने और सुरों से सजाया है स्वयं अरुण बख्शी ने। एक फोनवार्ता के दौरान अरुण जी ने बताया कि उनके आत्मीय मदन द्वारा रचित यह अंतिम गीत है। जिनके नहीं रहने पर अरुण के लिए तो उनका गाया यह बहुचर्चित गीत जैसे एक स्मृति गीत बन गया है। इस गीत की हृदयग्राही संगीत रचना अरुण बख्शी की ही है। छायांकन व निर्देशन मंगेश पवार का है। बिरेन्दर शर्मा द्वारा सम्पादित इस गीत को अरुण बख्शी और सुनैना दुबे पर फिल्माया गया है। नलिनी वशिष्ठ और रीना वशिष्ठ ने अरुण तथा परिशी शाह ने सुनैना के लिए कास्ट्यूम डिजाइन किया है। सुनैना दुबे कत्थक विशारद हैं और इस गीत के लिए नृत्य निर्देशन का दायित्व भी उसी ने निभाया है। सूर्योदय सूर्यास्त व अन्य मनोहारी दृश्यों का कलात्मक छायांकन मंगेश पवार ने मुंबई से लगभग नब्बे किलोमीटर सुदूर गुजरात के वाडा में किया है।
एलबम में गायक अभिनेता अरुण बख्शी का लीक से हटकर प्रकट हुआ नया रूप दर्शक श्रोताओं को चकित करने के अलावा उन्हें एक नये भावलोक में विचरण करने के लिए विवश कर देता है। सुनैना की दर्शनीय युगलबंदी भी लुभावनी है। एक ओर जहाँ अरुण का दमदार व्यक्तित्व दृश्य को गरिमामय बनाता है, सुनैना की चपल मोहक भाव भंगिमा कुछ अलग ही समां बांधती है।
उन्होने कहा कि प्रेम के विरह गीत, मिलन की आहत चाहत का जो बेबाक चित्रण सूफी संगीत में है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। अरुण बख्शी का मन उनके पूर्ववर्ती गीत श्दिलबरश् और बोल मिट्टी देया बाबेया से भी द्रुतगति से लोकप्रिय हो रहा है। उक्त दोनों गीतों की दर्शक संख्या लगभग तीन मिलियन है जबकि मन को रिलीज हुए अभी एक सप्ताह ही हुआ है और दर्शकों की संख्या एक लाख के करीब जा पहुंची है। वीनस म्यूजिक द्वारा रिलीज इस गीत को उनके प्रशंसक ही नहीं स्वयं अरुण बख्शी भी अपनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ कृति मानते हैं। उनकी वजनदार आवाज एक अलग ही असर डालती है। अरुण बख्शी को कुंदनलाल सहगल के समकक्ष हठात् तो नहीं खड़ा कर सकते, पर, कुछ समानताएं तो हैं।
अरुण की कला यात्रा की बात करें तो अपने दौर के प्रसिद्ध गायक कुंदन लाल सहगल की भांति वह भी मूलतः अभिनेता ही हैं। वह भी उनकी तरह कभी नायक नहीं बने और अपने लिए कभी पार्श्वगायन नहीं किया। सौ से अधिक फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवा चुके अरुण ने अपने लिए न सही, मगर अजय देवगन, अक्षय कुमार, संजय दत्त जैसे सितारों के लिए जरूर पार्श्वगायन किया है। तीन सौ तेईस गीत गा चुकने के पश्चात उनके सिंगल म्यूजिक वीडियो आ चुके हैं। उनके गाये गीत इस कदर लोकप्रिय होते जा रहे हैं कि अब किशोर कुमार की तरह उनके लिए भी गायिकी ही प्रमुख हो गया है। अब देखने सुननेवाले अरुण के गीतों का इंतजार करते हैं। अरुण का दावा है कि श्मनश् को एक बार देखने सुनने के पश्चात आप भी उनके उसी प्रकार प्रशंसक हो जायेंगे, जैसे भारत कुमार अर्थात मनोज कुमार हुए हैं। मनोज कुमार तो अरुण बख्शी के गीतों के पुराने कद्रदान हैं, यह बात वह कभी पत्र तो कभी ट्विटर पर जाहिर करते रहते हैं। एक बार आप भी अवश्य देख सुन लें, अरुण बख्शी का निर्मल मन!
अंत में पत्रकार विद्यार्थी ने अरूण बख्शी को उनके नये एलबम की रिलीज की बधाई दी और कहा की पहले की तरह यह एलबम भी एक नया रिकार्ड बनाये। जिसपर अरूण बख्शी ने उनका धन्यवाद किया।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox