DDU अस्पताल से सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा 

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August 22, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-कर्मचारियों समेत कई आरोपी गिरफ्तार -कैसे सामने आया पूरा मामला

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  दिल्ली में सरकारी दवाओं की अवैध बिक्री से जुड़े एक बड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्राइम ब्रांच की विशेष टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि सरकारी अस्पतालों के लिए निर्धारित मुफ्त दवाओं को चोरी कर बाजार में बेचा जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए ट्रांसपोर्ट हब पर छापा मारा, जहां संदिग्ध गतिविधियों के बीच कई लोगों को भारी मात्रा में दवाओं के साथ पकड़ लिया गया। बरामद दवाओं पर स्पष्ट रूप से “सरकारी सप्लाई, बिक्री के लिए नहीं” अंकित था, जिससे पूरे मामले की गंभीरता उजागर हो गई।

बरामदगी और नेटवर्क का खुलासा
छापेमारी के दौरान लाखों रुपये मूल्य की जीवनरक्षक और महंगी दवाएं बरामद की गईं, जिनमें टैबलेट, इंजेक्शन और विशेष उपचार में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि यह अवैध धंधा लंबे समय से चल रहा था और इसमें अस्पताल के अंदर से ही दवाओं की चोरी की जा रही थी। स्टोर से दवाएं निकालकर रिकॉर्ड में हेरफेर किया जाता था, जिससे कमी छुपाई जा सके और फिर इन्हें बाहरी नेटवर्क के जरिए अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई किया जाता था।

अस्पताल कर्मचारियों की भूमिका
पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि इस पूरे रैकेट में अस्पताल के कर्मचारी भी शामिल थे, जो स्टॉक में गड़बड़ी कर दवाओं को बाहर पहुंचाने में मदद करते थे। इसके बाद इन्हें ट्रांसपोर्ट के जरिए विभिन्न शहरों में भेजा जाता था और दलालों के माध्यम से बाजार में बेचा जाता था। इस नेटवर्क में सप्लायर, ड्राइवर और बिचौलियों की अहम भूमिका रही, जो मिलकर इस गैरकानूनी कारोबार को संचालित कर रहे थे।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से दवाओं के साथ-साथ इस्तेमाल किए गए वाहन भी जब्त कर लिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है, जिसमें आर्थिक लेन-देन और अन्य जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट का दायरा कितने राज्यों तक फैला हुआ है।

व्यवस्था पर सवाल और सख्ती के संकेत
इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ताकि जरूरतमंद मरीजों के लिए भेजी जाने वाली सुविधाओं का दुरुपयोग रोका जा सके।

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