
उत्तर प्रदेश/उमा सक्सेना/- उत्तर प्रदेश विधानसभा में आज बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन के भीतर इस विषय पर बोलते हुए विपक्षी दलों पर कड़ा हमला किया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या का जिक्र करते हुए इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताया और कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरे सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय हैं।
विपक्ष पर दोहरे मापदंडों का आरोप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल गाजा के हालात पर तो संवेदनशीलता दिखाते हैं, कैंडल मार्च निकालते हैं और बड़े-बड़े बयान देते हैं, लेकिन जब बात बांग्लादेश या पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की आती है, तो वही लोग चुप्पी साध लेते हैं। योगी ने इस रवैये को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया।
मानवाधिकार सभी के लिए समान हों: योगी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानवाधिकार किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे बांग्लादेश हो या पाकिस्तान, जहां भी हिंदू समुदाय पर हमले हो रहे हैं, उन पर भी उसी संवेदनशीलता के साथ आवाज उठनी चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की जनता अब इस तरह की चयनात्मक राजनीति को समझ चुकी है और इसे आगे स्वीकार नहीं करेगी।
घुसपैठ पर सख्त रुख, कार्रवाई के संकेत
विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। योगी ने दो टूक कहा कि एक-एक अवैध घुसपैठिए को चिन्हित किया जाएगा और कानून के तहत देश से बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने साफ किया कि राज्य की धरती पर अवैध गतिविधियों और सुरक्षा से समझौते की कोई जगह नहीं है।
राजनीतिक माहौल गरमाया, प्रतिक्रियाओं का इंतजार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद विधानसभा में सियासी माहौल और गरमा गया। पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री के इस बयान पर विपक्षी दल क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आगे की राजनीति किस दिशा में जाती है।





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