नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- महिला वनडे विश्वकप में भारत ने एक नया इतिहास रच दिया है। ये जीत सिर्फ क्रिकेट की नहीं बल्कि जज़्बे, संघर्ष और अदम्य विश्वास की कहानी है। जिस टीम को कभी हल्के में लिया जाता था, आज वही टीम विश्व की चैंपियन बनकर उभरी है। इस सफर में तीन मुकाबले ऐसे रहे, जिन्होंने इस सुनहरे अध्याय को हमेशा के लिए अमर कर दिया – करो या मरो वाला न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच, सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर ऐतिहासिक जीत और फिर फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर विश्वविजेता बनना।
करो या मरो मुकाबले में स्मृति और प्रतिका की तूफानी जोड़ी
लीग चरण का सबसे अहम मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला गया। हार का मतलब था टूर्नामेंट से बाहर होना, लेकिन स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल ने हार की हर गुंजाइश खत्म कर दी। दोनों ने ओपनिंग करते हुए 200 से ज्यादा रन की साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। भारत ने विशाल स्कोर खड़ा कर 53 रनों से जीत दर्ज की। बारिश से प्रभावित इस मुकाबले में टीम ने हर परिस्थिति में धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाया। इसी जीत से भारत ने सेमीफाइनल में अपनी जगह सुनिश्चित की।
सेमीफाइनल में जेमिमा का करिश्मा, ऑस्ट्रेलिया के घमंड को तोड़ा
सेमीफाइनल से ठीक पहले टीम को बड़ा झटका लगा जब प्रतिका रावल चोटिल होकर टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। उनकी जगह शेफाली वर्मा को मौका मिला। भारत का सामना था सात बार की विश्वविजेता ऑस्ट्रेलिया से — वो टीम जो पिछले 15 मुकाबलों से अपराजेय थी। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने शानदार शुरुआत की, लेकिन युवा गेंदबाज अमजोत कौर और श्री चरणी ने रनगति पर रोक लगाकर मैच का रुख पलट दिया।
जब भारत की बारी आई तो शुरुआती झटकों के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर और जेमिमा रॉड्रिग्स ने मिलकर इतिहास रच दिया। जेमिमा ने नाबाद 127 रनों की पारी खेलते हुए टीम को 339 के रिकॉर्ड लक्ष्य तक पहुंचाया। यह जीत केवल एक मैच नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और आत्मविश्वास की परिणति थी।
फाइनल में शेफाली का जलवा, दीप्ति ने पूरी की जीत की कहानी
फाइनल में भारत का सामना दक्षिण अफ्रीका से हुआ। टीम ने फिर टॉस गंवाया और पहले बल्लेबाजी करने उतरी। शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना ने शानदार शुरुआत दी। शेफाली ने 87 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति दी, वहीं दीप्ति शर्मा ने अपने अनुभव से मध्यक्रम को संभाला और एक और अर्धशतक जड़ा। भारत ने 298 रन बनाए।गेंदबाजी में भी शेफाली का जादू देखने को मिला। उन्होंने लगातार दो विकेट लेकर मैच में वापसी कराई, जिसके बाद दीप्ति शर्मा ने विकेटों की झड़ी लगा दी। उनके हर स्पेल ने विरोधी टीम की उम्मीदों को तोड़ दिया। अंततः भारत ने जीत दर्ज कर पहली बार महिला वनडे विश्वकप का खिताब अपने नाम किया। शेफाली को प्लेयर ऑफ द फाइनल और दीप्ति को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
नई सुबह, नई प्रेरणा
ये जीत सिर्फ ट्रॉफी नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। स्मृति, जेमिमा, शेफाली और दीप्ति जैसी खिलाड़ी अब भारत की बेटियों के लिए नई मिसाल बन गई हैं। उन्होंने दिखा दिया कि हौसला, मेहनत और टीम स्पिरिट के दम पर कोई भी सपना हकीकत बन सकता है।


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