नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/चंडीगढ़/नई दिल्ली/सिद्धार्थ राव/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- हरियाणा सरकार ने आदेश जारी किए है कि अब से हरियाणा में भी डीसी (उपायुक्त) जिले का डीएम (जिलाधीश) होगा। बीती 11 मई 2020 को हरियाणा सरकार के न्याय-प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन, आईएएस द्वारा एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर सी.आर.पी.सी. की धारा 20(1) में प्रदेश में हर जिले के डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त ) के पद पर तैनात अधिकारियों को सी.आर.पी.सी. 1973 की धारा 20(1) में कार्यकारी मजिस्ट्रेट एवं अपने सम्बंधित जिले का जिला मजिस्ट्रेट (जिलाधीश) नियुक्त किया है जब तक वह अपने जिले का उपायुक्त रहेगा।
यहां बता दें कि उक्त नोटिफिकेशन बीती 12 मई को हरियाणा सरकार के गजट (राजपत्र ) में प्रकाशित हुई है इसलिए यह उसी दिन से प्रभावी होगी अर्थात 12 मई से पहले हरियाणा में हर जिले में तैनात उपायुक्तों द्वारा अपने जिले के जिलाधीशों के तौर पर जो भी कार्यवाही की गयी हैं एवं जो भी आदेश एवं निर्देश पारित किये गए हैं, उन्हें कानूनी मान्यता देने की भी आवश्यकता होगी।
गौरतलब है कि करीब ढ़ाई साल पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर सरकार ने यह कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट की एक संवैधानिक बेंच के निर्णय के अनुसार अजैब सिंह बनाम गुरबचन सिंह (फरवरी 1965) का अध्ययन किया गया, तो उन्हें पता चला कि राज्य सरकार द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी)1973 की धारा 20 (1) के तहत आदेश नोटिफिकेशन जारी होने के पश्चात ही डीसी अपने जिले के डीएम के तौर पर कानूनी रूप पर से कार्य कर सकते हैं। अगर इसके बगैर वह ऐसा करता है, तो डीएम के तौर पर उसके द्वारा पारित आदेशों एवं की गई कार्रवाई की कोई कानूनी मान्यता एवं वैधता नहीं होगी। सीआरपीसी की धारा 144 में कर्फ्यू और लॉकडाउन संबंधी सभी आदेश और निर्देश भी डीसी द्वारा जिलाधीश के तौर पर ही जारी किए जाते हैं। हरियाणा सरकार के न्याय-प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयवर्धन ने इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी कर डीसी को डीएम के रूप में पदांकित कर दिया है। वर्षो से हम सब यही पढ़ते और सुनते आए हैं कि हर जिले का डी.सी. (उपायुक्त) अपने जिले का कलेक्टर और डी.एम. (जिलाधीश) भी होता है। लेकिन कानूनी तौर पर ऐसा नहीं है अर्थात डी.सी. अपने जिले का पदेन (अपने पद के कारण) ही डी.एम. नहीं होता है।


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