बिजवासन सीट पर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

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बिजवासन सीट पर चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

-बिजवासन में तीनों उम्मीदवारों का रहा है आम आदमी पार्टी से रिश्ता

बिजवासन/शिव कुमार यादव/- बिजवासन विधानसभा सीट का चुनाव काफी रोचक हो चला है। इस सीट को लेकर लोगों की उत्सुकता को देखते हुए चर्चाओं का बाजार काफी गर्म हो चला है। बिजवासन सीट पर होने वाले मुकाबले की खास बात यह है कि इस सीट पर तीनों प्रत्याशियों का कहीं न कही आम आदमी पार्टी से रिश्ता रहा है या फिर यूं कहें की बिजवासन सीट पर एक तरह से आप ही चुनाव लड़ रही है। यह बात और है कि कांग्रेस व भाजपा के प्रत्याशी आम आदमी पार्टी को छोडकर ही आए हैं।

बिजवासन सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी कर्नल देवेन्द्र सहरावत है जो पहले इस सीट से आप के वियायक रह चुके हैं। वहीं भाजपा के प्रत्याशी कैलाश गहलोत भी पहले आप में थे और विधायक व मंत्री रहे है लेकिन अब भाजपा से चुनाव लड़ रहे है। आम आदमी पार्टी से सुरेन्द्र भारद्वाज तो हैं ही आप के प्रत्याशी। इस तरह से देखा जाए तो कहीं न कहीं आप की आइडोलॉजी ही बिजवासन में काम कर रही है। इस समीकरण को देखकर लोगों में काफी उत्सुकता दिख रही है। लोग कह रहे है कि यह बात और है कि तीनों पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में है लेकिन सभी का नाता कहीं न कहीं आप से ही रहा है।

बिजवासन सीट पर कांग्रेस, भाजपा व आप में कड़ा मुकाबला दिख रहा है। कर्नल देवेन्द्र सहरावत यहां से विधायक रहे है और क्षेत्र के काफी दमदार नेता है। लेकिन इस बार आप से टिकट नही मिलने पर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि अभी तक दिल्ली विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस पूरी तरह से हाशिए पर है लेकिन देवेन्द्र सहरावत के आने से कांग्रेस में जान आ गई है। बिजवासन सीट पर इस बार आप ने वर्तमान विधायक भूपेन्द्र जून का टिकट काटकर राजनगर की निगम पार्षद के पति सुरेन्द्र भारद्वाज को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। सुरेन्द भारद्वाज आम आदमी पार्टी के संगठन से जुड़े नेता हैं और आप में उनका अच्छा रिकार्ड है। लेकिन इस सीट पर जातिगत समीकरण देखें तो जाटों का दबदबा रहा है। अब सुरेन्द्र भारद्वाज क्या चमत्कार कर पाते हैं यह वक्त ही बताएगा। हालांकि पिछले एक दशक से इस सीट पर आम आदमी पार्टी का ही कब्जा रहा है। जिसकारण आप को पूरी उम्मीद है कि इसबार भी जनता उनका साथ देगी और आप प्रत्याशी जीत दर्ज करेगा।

भाजपा ने बिजवासन सीट पर आप के पूर्व राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत को सतप्रकाश राणा के जगह मैदान में उतारा है। जो आप से नजफगढ़ से लगातार तीन बार विधायक और मंत्री रहे हैं। वैसे तो नजफगढ़ क्षेत्र में उनसे कोई अपवाद नही जुड़ा है लेकिन नजफगढ के लोग आज भी उन्हे गुमशुदा नेता ही मानते है। वहीं ग्रामीणों की लाल डोरा की मांग, जमीनों के इंतकाल व किसानों की समस्याओं को हल नही करने के कारण उन्हे काफी असफल नेता करार दिया गया। वहीं परिवहन मंत्री रहते उन्होने जो डिपों नजफगढ़ क्षेत्र में खोलें और जो बसें नजफगढ़ में चलाई आज वही बसे नजफगढ़ के लिए जी का जंजाल बन गई हैं जिसकारण लोग उन्हे कोस रहे है। वहीं जिन लोगों को भाजपा का टिकट नही मिला वही लोग अब बाहरी का मुद्दा उछाल कर उनकी राह में रोड़े अटका रहे हैं। लेकिन पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सतप्रकाश राणा आप प्रत्याशी भूपेन्द्र जून से मात्र 753 के मामूली अंतर से हारे थे अगर इस बार भी भाजपा यही प्रदर्शन दोहरापाती है तो कैलाश गहलोत के लिए जीतना मुश्किल नही होगा।

अब आने वाला समय ही बतायेगा कि बिजवासन की जनता किसे अपना नेता चुनती है। हां इतना जरूर है कि आप का उम्मीदवार भले ही कमजोर हो लेकिन केजरीवाल के चेहरे पर उन्हे वोट मिलेंगी और यही उनका सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है। लेकिन आप से कांग्रेस में कर्नल देवेन्द्र सहरावत अपनी साफ छवि व ईमानदारी के कारण काफी चर्चा में रहे है और इस क्षेत्र के एक दमदार नेता माने जाते है लेकिन कांग्रेस को लोग इस बार कितना पंसद करेंगे यह देखना होगा। इसके साथ कैलाश गहलोत दिल्ली का एक जाना माना चेहरा है। और वह आप का मंत्री पद छोडकर भाजपा में आए हैं हालांकि उन पर बाहरी होने का तमगा लगाने की कोशिश हो रही है लेकिन फिर भी वह लगातार क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत बना रहे हैं। जिससे दिखता है कि उनका अनुभव लोगों को भाने लगा है।

अब देखना है कि बिजवासन में झाड़ू चलता है या फिर कमल खिलता हैं। कांग्रेस का हाथ लोग कैसे थामते है या फिर वही पिछला प्रदर्शन ही कांग्रेस के हिस्से आएगा। सारे समीकरणां पर नजर डालने के बाद यही निष्कर्ष निकलता है कि बिजवासन में इस बार मुकाबला काफी रोचक रहने वाला है।

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