गुवाहटी/शिव कुमार यादव/- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बिना एनआरसी के आवेदन पर नागरिकता मिलती है तो वह इस्तीफा दे देंगे। उनका यह बयान सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों को लागू करने पर असम में विपक्षी पार्टियों के प्रदर्शन के बाद आई है।
असम के सीएम ने कहा, “मैं असम का बेटा हूं और अगर एक भी व्यक्ति जिसने एनआरसी के लिए आवेदन नहीं किया है और उसे नागरिकता मिलती है तो मैं इस्तीफा देने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा।“ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सीएए लागू होने के बाद लाखों की संख्या में लोग राज्य में प्रवेश किए थे।

उन्होंने कहा, “अगर ऐसा होता है तो मैं विरोध करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए को लेकर कुछ भी नया नहीं है अब पोर्टल पर आवेदन का समय आ गया है।“ उन्होंने कहा, “अब पोर्टल पर डेटा बताएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कानून का विरोध करने वालों के लिए यह दावें सही है या नहीं।“
सीएए का समर्थन नहीं करने वालों को अदालत जाने का सुझाव
सीएम सरमा ने आगे कहा, “सीएए का समर्थन करने वाले भी असम में है और जो इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं, वे भी यहां है। जो भी सीएए का विरोध कर रहे हैं, वे कोर्ट जा सकते हैं। हमारा उद्देश्य राज्य में शांति बनाए रखना है। मैं सभी से अपील करना चाहता हूं कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें।“

क्या है नागरिकता संशोधन अधिनियम
बता दें कि सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। ऐसे अल्पसंख्यक, 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों।

इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है। नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक से छह साल किया गया है।


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