नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और ब्रिटेन के विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली ने मंगलवार को जी-20 की बैठक से पहले मुलाकात की। इस मौके पर ब्रिटेन के विदेश सचिव जेम्स क्लेवरली ने जयशंकर के सामने बीबीसी पर छापे का मुद्दा उठाया जिसके जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत में काम कर रही कंपनियों को भारत के कायदे कानून के हिसाब से चलना होगा।
बता दें कि जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की आज और कल दिल्ली में अहम मीटिंग होने जा रही है। इस मीटिंग से पहले बुधवार को ब्रिटेन के फॉरेन सेक्रेटरी जेम्स क्लेवरली ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। क्लेवरली ने इस दौरान 14 फरवरी को बीबीसी के दिल्ली और मुंबई स्थित दफ्तरों पर आयकर विभाग के सर्वे का मुद्दा उठाया। साथ ही क्लेवरली ने कहा कि बीबीसी एक स्वतंत्र संगठन है और सरकार भी अलग है। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री नहीं देखी है, लेकिन यूके और भारत की प्रतिक्रियाएं देखी हैं। जिसपर जयशंकर ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री से कहा है कि जो भी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, उन्हें देश के कायदे-कानून का पालन करना होगा।
जेम्स बोले-भारत के साथ बड़े पैमाने पर काम कर रहे
इस बीच भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जेम्स ने कहा कि हम भारत के साथ बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। मैं भारत के व्यापार सचिव से मिलूंगा। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस व्यापार समझौते से वास्तव में दोनों देशों को प्रौफिट हो।
फरवरी में तीन दिन तक इनकम टैक्स ने ली थी तलाशी
पिछले महीने यानी 14 फरवरी को तीन दिन तक इनकम टैक्स की टीम ने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर (ठठब्) के दफ्तरों में सर्वे किया था। दरअसल, बीबीसी ने इस साल जनवरी में ’इंडिया द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी। जिसमें 2002 के गुजरात दंगों को दिखाया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री के टेलीकास्ट को लेकर देश में कई जगह हंगामे भी हुए थे।
बीबीसी के दिल्ली-मुंबई ऑफिस पर आईटी रेड,
बीबीसी के दिल्ली और मुंबई ऑफिस पर आयकर विभाग की टीम ने सर्वे शुरू किया था। आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार बीबीसी पर इंटरनेशनल टैक्स में गड़बड़ी का आरोप है। बीबीसी ने ट्वीट कर बताया था- आयकर विभाग की टीम दिल्ली और मुंबई ऑफिस में मौजूद हैं। हम उन्हें पूरा सहयोग कर रहे हैं। सर्वे का काम अभी भी जारी है। ऑफिस में काम भी शुरू हो गया है।
दरअसल गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाः द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों और पुलिस में ठन गई थी। छात्रों का कहना था कि वे यह डॉक्यूमेंट्री देखना चाहते हैं, जबकि पुलिस उन्हें देखने नहीं दे रही है। पुलिस ने कहा- इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लिहाजा इसकी स्क्रीनिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती।
इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में बवाल हुआ था। दरअसल, यूनिवर्सिटी को खबर लगी कि छात्र संघ के ऑफिस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की जा रही है तो वहां की बिजली और इंटनेट काट दिया गया। इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।
भारत में चल रहे बीबीसी डॉक्यूमेंट्री पर विवाद में अमेरिका ने 48 घंटे में अपना स्टैंड बदल दिया। उसने प्रेस की स्वतंत्रता का हवाला देकर बीबीसी डॉक्यूमेंट्री का साथ देने की कोशिश की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने को प्रेस की स्वतंत्रता का मामला बताया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में फ्रीडम ऑफ स्पीच के महत्व को हाइलाइट्स करने का यह सही समय है और ऐसा भारत में भी लागू होता है।


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