नई दिल्ली/- देश के प्रमुख बौद्ध भिक्षुओं के एक संगठन ने अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत की है। बौद्ध भिक्षुओं ने राष्ट्रपति को लिखे पात्र में कहा है कि इस देश का कोई धर्म किसी दूसरे धर्म को अपमानित करने की अनुमति नहीं देता। दिल्ली सरकार में एक मंत्री रहते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कर संवैधानिक संस्था का भी अपमान किया है। यह गंभीर आपराधिक मामला है और इसके खिलाफ उन पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बौद्ध भिक्षुओं के संगठन ‘धर्म संस्कृति संगम’ के राष्ट्रीय महासचिव राजेश लांबा के द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए इस पात्र में 19 प्रमुख बौद्ध भिक्षुओं ने हस्ताक्षर किया है। इस पत्र में कहा गया है कि बौद्ध धर्म में ‘अप्प दीपो भव’ की शिक्षा दी जाती है। इसका अर्थ है कि ज्ञान प्राप्ति के लिए व्यक्ति को स्वयं ज्ञान के प्रकाश के रूप में परिवर्तित होने की कोशिश करनी चाहिए। भिक्षुओं ने कहा है कि बौद्ध धर्म सहित भारत का कोई भी धर्म के देवी-देवता को अपमानित करने की छूट नहीं देता। इस तरह के कार्य से देश और समाज में विद्वेष फैलता है जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
क्या है पूरा मामला
‘अरविंद केजरीवाल सरकार के एक मंत्री रहे राजेंद्र पाल गौतम ने गत पांच अक्तूबर को एक कार्यक्रम कराया था। दावा किया गया था कि इस कार्यक्रम में 10 हजार लोगों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई गई। इस धर्मांतरण के कार्यक्रम में राजेंद्र पाल गौतम लोगों से हिंदू देवी-देवताओं विष्णु, भगवान शंकर, पार्वती और गणेश की पूजा न करने की शपथ दिलाते हुए देखे गए थे। विवाद बढ़ने पर राजेंद्र पाल गौतम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।


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