नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- आए दिन कहीं ना कहीं शासन या सरकार द्वारा बैन या प्रतिबंध लगते रहे हैं। कब कहां कैसा प्रतिबंध जरूरी है या गैर जरूरी और क्या रेगुलेशन से वह अनुशासन आ सकता है या नहीं । इन विषयों पर गंभीर चर्चा के लिए 13 फरवरी 2022 को विश्व रेडियो दिवस पर “द अवेयर कंज्यूमर“ पत्रिका के सहयोग से राम जानकी संस्थान (आरजेएस) के राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना और तपसिल जाति आदिवासी प्रकटन्न सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र,पश्चिम बंगाल के सचिव सोमेन कोले की अगुवाई में प्रतिबंध की नीति पर खुलकर चर्चा हुई। परिचर्चा से पहले ,प्रथम सत्र में आरजेएस फैमिली स्नेह-मिलन और सेनानियों तथा महापुरुषों को श्रद्धांजलि देकर भारत रत्न से सम्मानित पार्श्व गायिका लता मंगेशकर के नाम आरजेएस राष्ट्रीय सम्मान 2022 घोषित किया गया।
आरजेएस सूचना केंद्र पटना से जुड़ी शिक्षिका प्रियंका सिन्हा के पति समाजसेवी स्व० दीपक कुमार मोहन की स्मृति में ये सम्मान घोषित किया गया। वेबीनार में देश और विदेश से लगभग पचहतर लोग जुड़े और गणमान्य अतिथि वजाहत हबीबुल्ला,प्रो. रबिनारायण , प्रफुल्ल डी सेठ आदि ने संबोधित किया। मुख्य वक्ता और मॉडरेटर कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक प्रो बिजॉन कुमार मिश्रा ने सफल संचालन किया। वहीं विशेष स्कूल अभीप्सा की सचिव सुमन कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अतिथियों का स्वागत जाने-माने फार्मासिस्ट प्रफुल्ल डी सेठ ने किया और कहा कि जाने-माने फार्मासिस्ट प्रफुल्ल डी सेट अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा किसी उत्पाद को बैन की जगह वैकल्पिक उत्पाद मुहैया कराना व्यवहारिक हो सकता है। जो उत्पाद कम नुकसान दे सकता है उसे जारी रखा जा सकता है क्योंकि बैन से सरकार के राजस्व को नुकसान भी होता है और कालाबाजारी का रास्ता खुलता है।
प्रतिबंध या बैन के दूरगामी प्रभावों की चर्चा करते हुए भारत के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि जनता के हित की नीतियां जनभागीदारी से बनें तो वह एक संविधान और लोकतांत्रिक नीति का सम्मान है। बहुत जरूरी होने पर बैन या प्रतिबंध की नीति प्रभावी शासन का जरूरी हिस्सा हैं, लेकिन एक बारगी विनियमन कानून(रेगुलेशन एक्ट) का भी संज्ञान नीति- निर्धारकों को लेना चाहिए।मुख्य अतिथि डीन आईटीआरए और द्रव्यगुण विभाग, जामनगर के विभागाध्यक्ष प्रो. वैद्य रबि नारायण आचार्य ने कहा कि सरकार किसी को खुश करने या फायदा पहुंचाने के लिए तो बैन नहीं कर रही है ? उत्पाद को प्रतिबंधित करते समय क्या संबंधित विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया गया ?क्योंकि हर पहलू पर विचार करके बैन या प्रतिबंध लगाना उचित और फलदाई है ।
मुख्य वक्ता एवं मॉडरेटर तथा कंज्यूमर ऑनलाइन फाउंडेशन के संस्थापक निदेशक प्रो. बिजॉन मिश्रा ने कहा कि सरकार के तंत्र को जनता के करीब रहने से ही बैन या प्रतिबंध पर जनता के लिए सार्थक नीति बन पाएगी। आरजेएस वेबीनार की सह-आयोजक द अवेयर कंज्यूमर पत्रिका की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके फरवरी अंक में प्रभावी शासन के लिए कौन सा प्रतिबंध कितना जरूरी है और कौन सा गैरजरूरी ? इसपर विद्वतजनों के विचार सही दिशा देते हैं। वेबीनार में जुड़े उपभोक्ता आंदोलन के कार्यकर्ता किशन परमार ने द अवेयर कंज्यूमर पत्रिका को लोगों को जागरूक करने का सार्थक प्रयास माना। अतिथि वक्ता पूर्व जीसी सदस्य, कंज्यूमर कोऑर्डिनेशन काउंसिल प्रकाश भाई बोसामिया ने कहा कि जो खराब है या नशा है, तो उसे केवल एक राज्य ही नहीं देश में बैन किया जाना चाहिए । गुटखा स्वास्थ्य के लिए खराब है तो इसे अभी तक बैंन क्यों नहीं किया गया। बिना विकल्प प्रतिबंध लगाने का हाल प्लास्टिक की तरह होगा। बैन या प्रतिबंध के अतिरिक्त और उपायों पर विचार विमर्श जरूरी है।
अगले रविवार 20 फरवरी को आरजेएस -टीजेएपीएस केबीएसके आजादी की अमृत गाथा के अगले वेबीनार की घोषणा के साथ ही वर्चुअल बैठक संपन्न हो गई।


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