योगी नीतियों पर सवाल खड़े करने वाले भाजपा विधायक राम इकबाल ने थामा सपा का दामन

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योगी नीतियों पर सवाल खड़े करने वाले भाजपा विधायक राम इकबाल ने थामा सपा का दामन

-सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिलाई पार्टी की सदस्यता

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/लखनऊ/शिव कुमार यादव/- यूपी में योगी की नीतियों को लेकर हमेशा सवाल खड़े करने वाले व आठ अगस्त को तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन करने वाले भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य व बलिया से पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह अपने साथियों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम इकबाल को पार्टी की सदस्यता दिलाई। राम इकबाल सिंह भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और उन्होने दावा किया था कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार कृषि कानूनों को वापस ले सकती है।
बता दें इससे पहले बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य एवं पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह (त्ंउ प्ुइंस ैपदही) ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साध दावा किया था कि राज्य सरकार को नौकरशाह चला रहे हैं तथा जन प्रतिनिधियों से लेकर पार्टी नेताओं को नौकरशाही तवज्जो नहीं देती है। पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा था कि पहले मंत्रियों से मुलाकात करने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को आना पड़ता था, अब स्थिति यह है कि मंत्रियों की अधिकारियों से मुलाकात तक नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि से लेकर पार्टी नेताओं की स्थिति अत्यंत बदतर हो गई है और इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
इससे पहले सिंह ने आठ अगस्त को तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा था कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार इन कानूनों को वापस ले सकती है। राम इकबाल सिंह ने रविवार रात जिले के नगरा में कहा था, ’किसानों की मांगे सही हैं। विधानसभा चुनाव और किसानों में रोष को देखते हुए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार इन कानूनों को वापस ले सकती है।’ उन्होंने कहा था कि कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनों के चलते बीजेपी के नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांवों में नहीं जा पा रहे हैं और आने वाले समय में किसान बीजेपी के जन प्रतिनिधियों का घेराव भी कर सकते हैं।
पूर्व विधायक राम इकबाल सिंह ने इजराइल के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस से कथित तौर पर जासूसी कराने जाने को लेकर संसद में चल रहे गतिरोध को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया था और कहा था कि लोकतांत्रिक देश में विपक्ष की मांग पर विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा,’यदि विपक्ष चाहता है कि जासूसी कांड की जांच हो तो सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि संसद का सत्र सुचारू रूप से चले।’
सिंह ने कोविड की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा की गई तैयारियों पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि सरकार ने दूसरी लहर से सबक नहीं लिया और मामलों से आगे निपटने के लिए कोई प्रभावी प्रबंध नहीं किए हैं। इसी वर्ष जून माह में सिंह ने राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के प्रबंधन पर सवाल उठाया था।
उत्तर प्रदेश में कोविड -19 संकट से निपटने की आलोचना करते हुए, सिंह ने दावा किया था कि दूसरी लहर के दौरान हर गांव में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई क्योंकि पहली लहर से कोई सबक नहीं सीखा गया। उन्होंने कहा था, ’कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान राज्य के हर गांव से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई,’ उन्होंने कहा था कि संक्रमण के कारण मरने वालों के परिजनों को 10 लाख रुपये दिए जाने चाहिए।
इससे पहले मई माह में, बीजेपी के सीतापुर विधायक राकेश राठौर ने राज्य में कथित कोविड -19 कुप्रबंधन पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि उन्हें बोलने पर देशद्रोह के आरोप का डर है। एक वीडियो क्लिप के अनुसार राकेश राठौर ने कहा था कि ’विधायकों की क्या स्थिति है? अगर हम बहुत ज्यादा बोलते हैं, तो देशद्रोह के आरोप हम पर भी लगाए जा सकते हैं।’

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