नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/हैल्थ डेस्क/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- आंखें ईश्वर का सबसे खूबसूरत उपहार मानी जाती हैं, इसमें होने वाली कोई भी समस्या सीधे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। पिछले कुछ वर्षों में गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल, जीवनशैली और आहार की गड़बड़ी के कारण लोगों को आंखों से संबंधित तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि बहुत ही कम उम्र के बच्चों की आंखों पर चश्मा चढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अचानक से धुंधला दिखाई देना शुरू होना ऐसी ही आंखों से संबंधित एक गंभीर समस्या है, हाल के वर्षों में जिससे बड़ी संख्या में लोग शिकार हुए हैं।
ब्लर विजन या धुंधली दृष्टि की स्थिति में चीजों पर फोकस करने या उन्हें साफ तरीके से देखने में समस्या होने लगती है। आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देने की दिक्कत या बेहतर तरीके से देखने के लिए बार-बार आंखों को रगड़ने की जरूरत पड़ सकती है, इसे सामान्य भी माना जाता है। हालांकि कम उम्र में ही इस तरीके की समस्या को विशेषज्ञ गंभीर बताते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ स्थितियों के साथ-साथ आंखों से संबंधित कई बीमारियों के कारण इस तरह की दिक्कत हो सकती है, जिसका समय पर निदान और इलाज आवश्यक है। आइए आगे की स्लाइडों में इस समस्या के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
ं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ विनीत सहगल बताते हैं, अचानक से धुंधला दिखाई देने के कई कारण हो सकते हैं। इसे आपात स्थिति माना जाता है जिसका जल्द से जल्द निदान और उपचार किया जाना आवश्यक है ताकि आंखों को स्थायी क्षति और रोशनी जाने से बचाया जा सके। सामान्यतौर पर लोगों को रेटिना से संबंधित समस्या, आई स्ट्रेन, ब्लड शुगर का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाने, आंखों की वाहिकाओं में रुकावट जैसी स्थिति के कारण इस तरह की समस्या हो सकती है। कारणों का समय पर पहचान करना बहुत आवश्यक होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, धुंधला दिखाई देने की समस्या एक या दोनों आंखों में हो सकती है। इससे संबंधित कुछ लक्षणों को लेकर लोगों को विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है, हालांकि सभी लोगों में यह लक्षण दिखाई दें, ऐसे आवश्यक नहीं है।
फोटोफोबिया या प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
आँखों में दर्द या लगातार सिरदर्द बना रहना।
आंखों में सूखापन और दर्द
आँखों से पानी आना
आँखों में चोट के लक्षण
पुतली का सफेद होना।
डॉ विनीत बताते हैं, धुंधली दृष्टि का उपचार पूरी तरह से इसके कारणों पर निर्भर करता है। जैसा कि उल्लेख किया गया है, मधुमेह और रक्तचाप जैसे अंतर्निहित स्थितियों के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है, ऐसे में सबसे पहले इसे ठीक करने की आवश्यकता होती है। कभी-कभी रेटिना डिटेचमेंट और आंख के अंदर रक्तस्राव के मामलों में सर्जरी करना पड़ सकता है। हाइपरोपिया और मायोपिया जैसे कारणों में रोगियों को चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
डॉ विनीत बताते हैं, आंखों की हमेशा पर्याप्त देखभाल करते रहना आवश्यक होता है। सुनिश्चित करें कि आप अपनी आंखों पर बहुत अधिक दबाव न डालें और बहुत ज्यादा रगड़ें नहीं। पर्याप्त नींद लेना बहुत आवश्यक है। बिना किसी नेत्र विशेषज्ञ की सलाह के किसी भी आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा इन बातों को ध्यान में रखकर धुंधली दृष्टि की समस्या से बच सकते हैं।
धूप में बाहर जाते समय ऐसे चश्मा पहनें जो आंखों को सुरक्षा प्रदान कर सके।
आंखों के लिए स्वस्थ पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। पालक जैसे पत्तेदार साग और हरी सब्जियों का सेवन सबसे फायदेमंद माना जाता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना लाभदायक हो सकता है। धूम्रपान न करें। नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं, खासकर अगर आपके परिवार में किसी को आंखों की बीमारी रह चुकी हो। संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कॉन्टैक्ट लेंस लगाने या निकालने से पहले अपने हाथ धोएं।


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