90% मुस्लिम जनसंख्या तो राष्ट्र “सेक्यूलर” क्यों? बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल का बड़ा बयान

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March 12, 2026

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90% मुस्लिम जनसंख्या तो राष्ट्र “सेक्यूलर” क्यों? बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल का बड़ा बयान

मानसी शर्मा /-   बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यकों और खास कर हिंदुओं के प्रति नफरत साफ तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच बांग्लादेश को इस्लामिक देश घोषित करने की मांग की जाने लगी है। इसके पीछे देश में मुस्लमानों की जनसंख्या को आधार बनाया गया है। दरअसल, बांग्लादेश के जस्टिस फराह महबूब और जस्टिस देबाशीष रॉय को अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने संविधान में अहम संशोधनों की मांग की है। उन्होंने बांग्लादेश के संविधान से ‘सेक्यूलर’शब्द को हटाने की मांग की है।साथ ही अटॉर्नी जनरल ने बांग्लादेश के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले और पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान को कानून “राष्ट्रपिता”का दर्जा हटाने की बात कही है।

संविधान से ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की मांग

दरअसल, अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने कोर्ट के समक्ष 15वें संशोधन को खत्म करने की अपील की है। उन्होंने कहा, “पहले अल्लाह पर हमेशा भरोसा और यकीन था। मैं चाहता हूं कि यह पहले जैसा ही रहे। आर्टिकल 2A में कहा गया है कि राज्य सभी धर्मों के पालन में समान अधिकार और समानता तय करेगा। आर्टिकल 9 बंगाली राष्ट्रवाद की बात करता है, यह विरोधाभासी है।“ साथ ही अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने कहा कि संवौधानिक संशोधनों और सत्ता के दुरुपयोग को बढ़ावा देने से बचना चाहिए।

अटॉर्नी जनरल ने आर्टिकल 7A और 7B भी आपत्ति जताई। क्योंकि ये आर्टिकल संविधान में उन तमाम बदलाव करने से रोक लगाता है, जो लोकतंत्र को खत्म कर सकता है। उन्होंने यह दावा किया कि ये आर्टिकल सुधार और सियासी ताकत को मजबूत करता है और लोकतंत्र को कमजोर बनाता है।

राष्ट्रपिता पर भी आपत्ति

बांग्लादेश में जब से शेख हसीना की सरकार गिरी है, तब से वहां कट्टरता लगातार सिर उठा रहा है। सरकार एक के बाद एक हिंदुओं के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। तो वहीं, अब इन कट्टर लोगों के निशाने पर बांग्लादेश के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले और पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान आ गए हैं। कोर्ट में अटॉर्नी जनरल मोहम्मद असदुज्जमां ने यह दावा किया कि शेख मुजीबर को “राष्ट्रपिता” लेबल करना अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ है। उन्होंने कहा,”शेख मुजीब के योगदान का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन इसे कानून द्वारा लागू करना विभाजन पैदा करता है।”गौरतलब है कि, शेख हसीना के देश छोड़ते ही प्रदर्शनकारियों ने शेख मुजीब के प्रतिमा को नष्ट कर दिया था। साथ ही उसपे पेशाब भी किया था।

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