इससे ज्यादा और झुका तो जीते जी ही मर जाऊंगा

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

April 2025
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
April 18, 2025

हर ख़बर पर हमारी पकड़

इससे ज्यादा और झुका तो जीते जी ही मर जाऊंगा

इससे ज्यादा और झुका तो
              जीते जी ही मर जाऊंगा

हद से ज्यादा क्या होगा की,
          जीवन का सुख खो दूंगा मैं l
और बिछड़ कर तन्हाई में,
         फूट फूट कर रो दूंगा मैं ll
पर चुटकी भर सुख की खातिर
     मैं मरने से डर जाऊंगा?
इससे ज्यादा और झुका तो
              जीते जी ही मर जाऊंगा

कहो तुम्हारी ज़िद के आगे,
      मेरुदंड को धनुष बना दूँ l
स्वाभिमान की थाती को मैं,
     तेल छिड़क कर आग लगा दूँ ll
स्वर्णमृग की चाह जगी तो
             पीड़ाओं से भर जाऊंगा
इससे ज्यादा और झुका तो
              जीते जी ही मर जाऊंगा l

तुमको ऐसा लगता होगा,
      अपनी ज़िद पर अड़ा हुआ हूँ l
पर सच है की सर-शैया पर,
      रक्तरंजित हो पड़ा हुआ हूँ ll
ठाना जिसके दिल घर करना
      मैं बस उस के घर जाऊंगा
इससे ज्यादा और झुका तो
              जीते जी ही मर जाऊंगा l

     बौनापन अभिशाप नहीं है
          बौनो का भी क़द होता है
अंतहीन हो सफर भले पर
     उसका भी मक़सद होता है
डोर सब्र की छूट गईं तो
   हद के पार गुजर जाऊंगा
इससे ज्यादा और झुका तो
              जीते जी ही मर जाऊंगा

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox