मध्य प्रदेश/उमा सक्सेना/- मध्य प्रदेश के दतिया से जुड़े एक पुराने जालसाजी मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। हालांकि सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद उन्हें अदालत से जमानत भी मिल गई, लेकिन इस फैसले के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
एफडी में हेराफेरी का मामला साबित
यह मामला साल 1998 का बताया जा रहा है, जब आरोपी एक सहकारी बैंक के अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे। आरोप था कि उन्होंने अपने परिजन से जुड़े संस्थान के नाम पर जमा की गई करीब 10 लाख रुपये की एफडी के ब्याज को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निकाल लिया। अदालत में पेश सबूतों के आधार पर इस आरोप को सही पाया गया और इसे गंभीर आर्थिक अपराध माना गया।
गंभीर धाराओं में हुई सजा
कोर्ट ने इस मामले में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित कई धाराओं के तहत सजा सुनाई है। इसके साथ ही बैंक के एक कर्मचारी को भी इस मामले में दोषी माना गया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के मामलों से वित्तीय संस्थानों की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
विधायकी पर मंडराया खतरा
तीन साल की सजा मिलने के बाद अब विधायक की सदस्यता पर संकट गहरा सकता है। कानून के अनुसार, दो साल से अधिक की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता रद्द हो सकती है। हालांकि यदि तय समय के भीतर उच्च न्यायालय से राहत मिल जाती है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है।
आगे की कानूनी लड़ाई पर नजर
अब सभी की नजर इस बात पर है कि आरोपी इस फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करते हैं या नहीं। आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक असर दोनों ही महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।


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