नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने 23 वर्ष पुराने हत्या मामले में अपने खिलाफ आए दोषसिद्धि के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें उचित सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया गया और न्याय प्रक्रिया में उनके साथ जल्दबाजी की गई।
मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
अमित जोगी ने अपनी विशेष अनुमति याचिका (SLP) में कहा है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अपील को बिना पर्याप्त आधार के स्वीकार कर लिया। उनका कहना है कि मामले से जुड़े लगभग 11,000 पृष्ठों के दस्तावेज़ उन्हें केवल 24 घंटे पहले ही उपलब्ध कराए गए, जो किसी भी निष्पक्ष सुनवाई के लिए बेहद कम समय है।
सुनवाई प्रक्रिया पर उठे सवाल
याचिका के अनुसार, उच्च न्यायालय ने 24 मार्च को इस मामले की सुनवाई शुरू की और सभी पक्षों को अगले ही दिन पेश होने का निर्देश दिया। 25 मार्च को अमित जोगी ने दस्तावेज़ों की मांग के साथ समय बढ़ाने की अपील की, लेकिन उसी दिन CBI की अपील स्वीकार कर ली गई और अंतिम सुनवाई की तारीख 1 अप्रैल निर्धारित कर दी गई। जोगी का आरोप है कि दस्तावेज़ 27 मार्च को दिए गए, यानी अपील स्वीकार होने के बाद, जिससे उनके बचाव का अधिकार प्रभावित हुआ।
पुराने फैसले को पलटा गया
यह मामला दो दशकों से अधिक पुराना है। वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन हाल ही में उच्च न्यायालय ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी ठहरा दिया। अब इस पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अब सर्वोच्च न्यायालय में होगी सुनवाई
अमित जोगी की इस याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा, जहां यह तय होगा कि उच्च न्यायालय के फैसले और सुनवाई प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि हुई है या नहीं।


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