1947 का वो बजट, जिसने खाली खजाने के बावजूद रखी आत्मनिर्भर भारत की नींव

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1947 का वो बजट, जिसने खाली खजाने के बावजूद रखी आत्मनिर्भर भारत की नींव

-केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार 1 फरवरी को संसद में करेंगी11 बजट पेश

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  अपना देश 1947 में ही आजाद हो गया था। तब से भारत में अलग-अलग पार्टियों (Political Parties) की सरकार बनी हैं। इन पार्टियों की आर्थिक विचारधारा (Economic Ideology) भी अलग-अलग रही है। केंद्र में सत्तारूढ़ दलों ने अपनी विचारधारा के अनुरूप बजट में प्रावधान किए हैं। इनमें से कई बजट देश की इकॉनमी की दिशा-दशा को बदलने वाले साबित हुए। इनमें 1947, 1951, 1968, 1991, 2014, 2017, 2020 और 2025 के बजट शामिल हैं। ये ऐसे बजट रहे जिन्होंने देश की इकॉनमी को नई राह दिखाई। तभी तो इन बजट को आज भी याद किया जाता है।

बजट 1947
भारत की आजादी के बाद यह पहला बजट था। भारत के पहले वित्‍त मंत्री आर. के. षनमुखम चेट्टी (RK Shanmukham Chetty) ने 26 नबंबर 1947 को उस साल का बजट पेश किया था। यह पेश तो नवंबर के अंतिम दिनों में हुआ था, लेकिन यह 15 अगस्‍त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के लिए पेश किया गया था। उस समय देश के सामने पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से वाले शरणार्थियों को बसाने की बड़ी चुनौती थी। इसके लिए सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं था। लेकिन बजट से इस समस्या का हल किया गया था।

बजट 1951
लोकतांत्रिक भारत का यह पहला बजट बजट था जिसे तत्कालीन वित्‍त मंत्री जॉन मथाई ने 28 फरवरी 1950 को पेश किया था। इसी के जरिए देश में योजना आयोग की स्‍थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इस आयोग ने देश के भीतर मौजूद संसाधनों के अधिकतम इस्‍तेमाल से जरूरत के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में विकास का खाका खींचा। हालांकि नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसका नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया है। इसी बजट में पहली बार बजट की विस्‍तृत कॉपी पेश की गई थी। इसमें साल में 1.21 लाख रुपये से अधिक कमाने वालों पर 8.5 आना प्रति‍ रुपये के हिसाब से ‘सुपर टैक्‍स’ लगाया गया था।

बजट 1957
जवाहर लाल नेहरू सरकार के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री टी टी कृष्णामाचारी ने 15 मई, 1957 को बजट पेश किया था। इस बजट में कई महत्वपूर्ण फैसले हुए थे। इस बजट में आयात के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य किया था। इसी बजट में नॉन-कोर प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटन वापस ले लिया गया। इस बजट में वेल्थ टैक्स भी लगाया गया था। साथ ही एक्साइज ड्यूटी में 400 फीसदी तक का इजाफा हुआ था।

बजट 1968
इस बजट को भारत का पहला पीपुल सेंसिटिव बजट कहा जाता है। इसे तत्कालीन वित्‍त मंत्री मोरारजी देसाई ने 29 फरवरी 1968 को प्रस्तूत किया था। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इसमें फैक्‍टरी के गेट पर सामान की स्टाम्पिंग और एसेसमेंट की बाध्‍यता खत्‍म कर दी गई। इसी बजट में सेल्‍फ एसेसमेंट का सिस्‍टम लाया गया था। इस प्रावधान से देश में मैन्‍युफैक्‍चरिेंग को बढ़ाने में काफी मदद मिली थी।

बजट 1973
तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण ने 28 फरवरी, 1973 को यह बजट पेश किया था। इसमें जनरल इंश्योरेंस कंपनियों, इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन और कोल माइन्स के राष्ट्रीयकरण के लिए 56 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए। कोयले के खदानों के राष्ट्रीयकरण की वजह से वित्त वर्ष 1973-74 में बजट में अनुमानित घाटा 550 करोड़ रुपये रहा था। यह खदान क्षेत्र का सबसे बड़ा सुधार था।

बजट 1991
भारत के इतिहास में इस बजट को सबसे क्रांतिकारी बजट माना जाता है। इसी बजट से भारत में उदारीकरण यानी लिबरलाइजेशन, निजीकरण यानी प्राइवेटाइजेशन और वैश्वीकरण यानी ग्लोबलाइजेशन की शुरुआत हुई थी। उस समय भारतीय इकनॉमी नाजुक दौर में पहुंच चुकी थी। देश के सामने बैलेंस ऑफ पेमेंट का संकट था। इसलिए तत्कालीन वित्‍त मंत्री मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को यह ऐतिहासिक बजट पेश किया था। इसमें आयात और निर्यात के क्षेत्र में बड़े फैसला हुए। नेहरू के दौर से चले आ रहे लाइसेंस राज को खत्म कर दिया गया। सभी बड़े सेक्‍टर देशी-विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिए गए।

बजट 2005
इसे आम आदमी का बजट कहा जाता है। उस साल वित्त मंत्री पी चिदंबरम बजट में कॉरपोरेट टैक्स और कस्टम ड्यूटी में कमी की घोषणा की थी। इसी के साथ-साथ मनरेगा (MNREGA) और आरटीआई (RTI) कानून लाने की बजट में घोषणा की गई थी। ग्रामीण रोजगार योजना से ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के पलायन को रोकने में काफी मदद मिली थी।

बजट 2017
तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बजट को पेश किया था। इसी बजट से ही देश में वस्तु एवं सेवा कर या जीएसटी का प्रादुर्भाव हुआ था। इस बजट को अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में सुधार का सबसे बड़ा कदम बताया जाता है। इसके बाद देश भर में अप्रत्यक्षर कर का हिसाब-किताब एक सिंगल नेटवर्क में आ गया। इसे उद्योग जगत को कारोबार को बड़ा फायदा हुआ ही, ग्राहकों को भी पूरे देश में एक वस्तु एक कर का लाभ मिला। इससे पहले हर राज्य में सेल्स टेक्स की दर अलग अलग होती थी।

बजट 2020
साल 2020 का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया था। उस साल उन्होंने बजट का इतना लंबा भाषण पढ़ा था कि यह रिकार्ड बन गया। यह अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण माना जाता है। इसी बजट में न्यू पर्सनल इनकम टैक्स रिजीम की शुरुआत की गई थी। इसे आम भाषा में न्यू टैक्स रिजीम कहा जाता है।

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