हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का निधन, जानिए उनके जीवन से जुड़ा एक अहम किस्सा

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October 24, 2026

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का निधन, जानिए उनके जीवन से जुड़ा एक अहम किस्सा

अनीशा चौहान/-  हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का निधन हो गया है। उन्होंने 89 वर्ष की उम्र में गुरुग्राम के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद राजनीतिक जगत के तमाम दिग्गज नेताओं ने उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। हरियाणा की राजनीति में ओमप्रकाश चौटाला को “ओपी” और “ताऊ” के नाम से भी जाना जाता था। उन्हें राजनीति विरासत में मिली थी, क्योंकि उनके पिता चौधरी देवीलाल ने उन्हें राजनीति की कमान सौंपी थी। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया था जब देवीलाल ने उन्हें घर से निकाल दिया था। आइए जानते हैं, क्या था वह किस्सा।

एयरपोर्ट पर पकड़े गए थे ओमप्रकाश चौटाला
यह वाक्या साल 1978 का है, जब चौधरी देवीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे। ओमप्रकाश चौटाला उस समय साउथ-ईस्ट एशिया के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने बैंकॉक गए थे। 22 अक्टूबर को भारत लौटते समय दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उनके बैग से 4 दर्जन घड़ियां और 2 दर्जन महंगे पेन जब्त कर लिए थे। इसके बाद यह खबर फैल गई कि ओमप्रकाश चौटाला तस्करी के आरोप में गिरफ्तार हो गए हैं।

घर से किए गए थे बाहर
जब ओमप्रकाश चौटाला को कस्टम विभाग ने पकड़ा, तब चौधरी देवीलाल चंडीगढ़ पीजीआई में अपना इलाज करवा रहे थे। उन्हें जैसे ही यह जानकारी मिली कि उनका बेटा तस्करी के मामले में पकड़ा गया है, तो उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि “मेरे घर के दरवाजे ओमप्रकाश के लिए हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं।” यह बयान उन दिनों काफी चर्चा में रहा।

निर्दोष पाए गए थे चौटाला
हालांकि, बाद में तत्कालीन वित्त मंत्री संपत सिंह ने बताया कि ओमप्रकाश चौटाला घड़ियों की तस्करी नहीं कर रहे थे। दरअसल, उन्हें विदेशी दौरे पर उपहार में घड़ियां मिली थीं और वह उन्हें ही बैग में भरकर भारत लाए थे। जांच के बाद ओमप्रकाश चौटाला को निर्दोष पाया गया। इसके बाद देवीलाल ने भी अपने बेटे को माफ कर दिया और उनका घर से बाहर किया गया निर्णय बदल दिया।

यह घटना ओमप्रकाश चौटाला के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जो राजनीतिक दुनिया में हमेशा याद रखा जाएगा। उनके निधन से हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा खालीपन आ गया है, और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।

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