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February 12, 2026

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हम लहू से वह ग़ज़ल लिख जाएंगे…

-मेरे सर्वाधिक लोकप्रिय गीत का इतिहास- विद्यार्थी -अब तुम विद्यार्थी नही अध्यापक हो बन गये- मनोज कुमार

लेख/– मनोज कुमार को लेकर कवि व लेखक विद्यार्थी एक अनुठा प्रसंग सुनाते हुए बोले- मनोज कुमार जी ने अपनी एक फिल्म के गीत लिखने के लिए मुझे मुंबई बुलाया था, मेरा लिखा पहला गीत ही उन्हें इतना पसंद आया कि खुश होकर बोले वाह ! अब तुम विद्यार्थी नहीं रहे, अध्यापक हो गए हो।
           मनोज कुमार बोले भविष्य में मैं तुम्हें यही कहकर पुकारूंगा। इस पर मैंने कहा कि विद्यार्थी बने रहने में ही लाभ है क्योँकि कोई भूल हो जाने पर क्षमाप्रार्थी भी हुआ जा सकता है जबकि अध्यापक को यह छूट शायद नहीं मिल सकती ।
         मेरी बात पूरी होने पर उन्होंने तुरंत संगीतकार उत्तम सिंह जी से फोन पर बात की और उन्हें मेरे मुंबई आने और मेरे लिखे गीत के बारे में बताया। उत्तम जी ने वह गीत सुनने की इच्छा जताई तो मनोज जी ने फोन मुझे पकड़ा दिया। इस तरह उत्तम जी से मेरी पहली मुलाकात फोन पर ही हुई। गीत सुनकर वह भी बहुत प्रभावित हुए ।
           उत्तम जी से रूबरू होने का मौका मुझे पहली बार तब मिला जब वह किसी काम से दिल्ली आए और मुझे दीपाली चौक के निकट एक मित्र के निवास पर मिलने को कहा। उत्तम जी से मिलकर कुछ वैसी ही खुशी हुई जो परिवार के किसी बड़े बुजुर्ग से मिलकर होती है। मुलाकातों का यह सिलसिला बाद मेँ भी जारी रहा। मुंबई जाने पर उनसे भेंट करने मैं कई बार उनके निवास पर गया। प्रस्तुत चित्र ऐसी ही एक यादगार मुलाकात का है। इस मुलाकात की एक खास बात यह रही कि मेरे बेटे विनीत ने मेरा गीत उनसे अनुमति लेकर उन्हीं के हारमोनियम पर गाकर सुनाया। उत्तम जी ने खुश होकर आशीर्वाद दिया, साथ ही यह भी बताया कि यह हारमोनियम कभी संगीतकार ओमी जी ने उपहार स्वरूप दिया था और इसे अब से पहले उनके अलावा किसी ने नहीं छुआ। कुल मिलाकर बेहद ही सहज इन्सान हैं उत्तम सिंह जी। बॉलीवुड के बहुत कम लोगों में इस सहजता के दर्शन हो पाते हैं।
   …अब रही बात मेरे उस अमर गीत की, जिसे मनोज जी ने पसंद किया और उत्तम जी ने भी सराहा। कवि सम्मेलनों में भी मेरे उस गीत को बार-बार सुना और सराहा गया

दूसरी ओर
मनोज जी ने बेटे कुणाल को मुख्य भूमिका में लेकर शहीद ए आज़म भगतसिंह के चरित्र पर आधारित फिल्म के निर्माण का इरादा अजय देवगन और बॉबी देओल को भी भगतसिंह के रूप में प्रस्तुत करने वाली फिल्मों की घोषणा हो जाने के बाद स्थगित कर दिया। इस घटना से एक बार फिर सिद्ध हो गया कि समय से पहले और भाग्य से अधिक किसी को कुछ नहीं मिलता। -कृष्ण गोपाल विद्यार्थी

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