सऊदी अरब की राजकुमारी बस्मा और उनकी बेटी की हुई जेल रिहाई

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सऊदी अरब की राजकुमारी बस्मा और उनकी बेटी की हुई जेल रिहाई

-लगभग तीन साल से बिना किसी आरोप के थी कैद में, 2020 में सोशल मीडिया पर राजकुमारी ने साझा की थी गिरफ्तारी की बात

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/देश-दुनिया/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- सऊदी अरब में पिछले तीन साल से बिना किसी आरोप के जेल में बंद सऊदी राजकुमारी व उनकी बेटी को रिहा कर दिया गया है। वह महिलाओं और मानवाधिकारों के हक में आवाज उठाती रही हैं। मानवाधिकारों की मुखरता के साथ वकालत करने वाली और शाही परिवार की सदस्य राजकुमारी बस्मा बिंत सऊद बिन अब्दुल्लाजीज अल-सऊद (57) मार्च 2019 में अपनी वयस्क बेटी सऊहूद अल-शरीफ के साथ लापता हो गई थीं लेकिन अब उनकी रिहाई के साथ सारी कहानी सामने आ गई है। लेकिन मामले में सार्वजनिक रूप से कभी टिप्पणी न करने वाली सऊदी सरकार की ओर से अभी इस पर कोई बयान नहीं आया है।

साल 2020 में राजकुमारी बस्माह की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई थी। इसमें उन्होंने बताया था कि मुझे राजधानी रियाद में एक साल से अधिक समय से कैद करके रखा गया है और मेरी तबीयत खराब है। उन्होंने वर्तमान शासक और अपने भतीजे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से रिहा करने की और चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराने की मांग की थी।

उन्होंने दावा किया था कि मुझे बिना किसी आरोप के अल-हायर जेल में रखा गया है, जहां कई अन्य राजनीतिक कैदी भी कैद करके रखे गए हैं। मुझे या मेरी बेटी को गिरफ्तारी के बारे में कोई कारण, स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। राजकुमारी बस्माह किंग सऊद (दिवंगत) की सबसे छोटी संतान हैं। जानकारी के अनुसार गिरफ्तारी के समय उन्हें इलाज के लिए विदेश जाना था।

उनकी रिहाई के बाद सऊदी अरब में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन एएलक्यूएसटी ने कहा कि जीवन के लिए घातक साबित हो सकने वाली समस्या से पीड़ित राजकुमारी को चिकित्सकीय मदद नहीं उपलब्ध कराई गई। संगठन के अनुसार उन्हें मार्च 2019 में गिरफ्तार किया गया था और अप्रैल 2019 तक अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं करने दिया गया था।

उनके कानूनी सलाहकार हेनरी एस्ट्रामैंट ने शनिवार को बताया कि दोनों को मनमानी कैद से रिहा कर दिया गया है और छह जनवरी को वह जेद्दाह में स्थित अपने घर पहुंच गई थीं। राजकुमारी ठीक हैं लेकिन उन्हें चिकित्सकों की मदद लेनी होगी।

परिवार के करीबी एक सूत्र के मुताबिक, राजकुमारी बासमा को इलाज के लिए स्विट्जरलैंड जाने की योजना से कुछ समय पहले गिरफ्तार किया गया था. उसकी बीमारी की प्रकृति का कभी खुलासा नहीं किया गया है। प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जून 2017 में अपने पिता किंग सलमान से सत्ता मिलने के बाद सुधार अभियान की शुरुआत की। इन सुधारों के तहत महिलाओं को ड्राइविंग की इजाजत दी गई। इस पर दशकों से बैन लगा हुआ था. इसके अलावा, तथाकथित ‘गार्जियनशिप’ नियमों में ढील देना शामिल है। ‘गार्जियनशिप’ के तहत महिलाओं पर पुरुषों को अधिक अधिकार दिए गए थे।

हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने शाही परिवार के असंतुष्टों और यहां तक कि संभावित विरोधियों पर भी शिकंजा कसा है. इसके प्रचारकों से लेकर महिला अधिकार कार्यकर्ताओं तक यहां तक कि शाही परिवार के सदस्य भी शामिल है। राजकुमारी बासमा को अल-हेयर जेल में रखा गया था, जहां कई अन्य राजनीतिक बंदियों को रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र में दी गई लिखित गवाही में राजकुमारी के परिवार ने कहा कि उनकी नजरबंदी इसलिए की गई, क्योंकि वह मुखर थीं। कई स्रोतों के अनुसार, मार्च 2020 में शाही गार्ड ने किंग सलमान के भाई और भतीजे को प्रिंस मोहम्मद के खिलाफ तख्तापलट करने का आरोप लगाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

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