बहादुरगढ़/- रक्षाबंधन का पर्व एक और जहां भाई-बहन के अटूट रिश्ते को राखी की डोर में बांधता है, वहीं यह वैदिक समाज को वर्ष भर में आत्म शुद्धि का अवसर भी प्रदान करता है। वैदिक परंपरा के अनुसार वेद पाठियों के लिए श्रावण मास की पूर्णिमा सबसे बड़ा त्यौहार है। यही कारण है कि वीरवार को लोवा कलां स्थित कन्या गुरुकुल में नव आगंतुक छात्राओं के उपनयन संस्कार और वेदारंभ के साथ श्रावणी पर्व मनाया गया।

वीरवार को समारोह का आरंभ यज्ञ के साथ प्रातः 8ः00 बजे आरंभ हुआ। इस अवसर पर यज्ञ के मुख्य ब्रह्मा अचार्य सत्यम जी रहे जबकि आर्य समाज के प्रचार मंत्री आर्य हरिओम दलाल, सतपाल वत्स ब्रह्मजीत आर्य, सुनील, विजेंद्र खोखर, जयपाल दहिया, करतार सिंह टिकरी, सतबीर राठी, कर्नल राजेंद्र सहरावत, लक्ष्मी आर्या, कौशल्या, रमेश आर्य व दिल्ली से एसडीएम सुचेत सिंह आर्य तथा हिमांशु आर्य के साथ-साथ छात्राओं के अभिभावकों ने भी इसमें भाग लिया। इस अवसर पर गुरुकुल की ब्रह्मचारिणियों ने अनेक सांस्कृतिक आयोजन पेश किए। आचार्य राजन मान व विद्यावती ने बताया कि श्रावणी उपक्रम के दौरान आत्म शुद्धि के लिए अभिषेक और हवन किया जाता है ताकि बच्चे शुद्ध मन से अपनी पठन पाठन की क्रिया को आरंभ कर सके।


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