चंडीगढ़/उमा सक्सेना/- सतलोक आश्रम, बरवाला के प्रमुख रामपाल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए इसे निलंबित कर दिया है। इस फैसले से उनके अनुयायियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अदालत ने कहा कि मुख्य अपील लंबित रहने तक रामपाल को जेल में रखना उचित नहीं है।
गिरफ्तारी और सजा का पूरा मामला
रामपाल को 19 नवंबर 2014 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि आश्रम के भीतर एक महिला अनुयायी की हत्या हुई थी। इसी मामले में अक्टूबर 2018 में हिसार की अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 343 (गलत तरीके से कैद) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तब से लेकर अब तक वह लगातार जेल में ही बंद थे।
हाईकोर्ट की दलील और प्रमुख टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल और न्यायमूर्ति दीपिंदर सिंह नलवा की खंडपीठ ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान में कई विवादास्पद पहलू हैं। मृतका के पति और सास ने भी अभियोजन के पक्ष का समर्थन नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि रामपाल की उम्र अब लगभग 74 साल है और वे पहले ही 10 साल से ज्यादा की कैद काट चुके हैं। ऐसे में मुख्य अपील पर अंतिम सुनवाई तक उनकी सजा को निलंबित करना न्यायोचित है।
रामपाल की ओर से रखे गए तर्क
रामपाल ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उन्होंने डॉक्टरों के बोर्ड की उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें मृतका की मौत निमोनिया से होने की बात कही गई थी। याचिका में बताया गया कि मृतका पहले से ही बीमारी से जूझ रही थी और घटना से लगभग एक माह पूर्व से ही निमोनिया से पीड़ित थी। साथ ही, यह भी दलील दी गई कि जब 13 सह-आरोपी पहले से ही जमानत पर बाहर हैं, तो समानता के आधार पर उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए।
सरकार का विरोध और अदालत का फैसला
राज्य सरकार ने इस याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आश्रम में महिलाओं को बंधक बनाकर रखा गया था और उन्हें भोजन व उचित सुविधा नहीं दी जाती थी, जिसके चलते दम घुटने से मौत हुई। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रामपाल की अपील लंबित रहने तक उनकी सजा निलंबित करने का आदेश दे दिया।
अब क्या आगे?
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर रामपाल किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें जल्द ही जेल से रिहाई मिल सकती है। यह फैसला उनके अनुयायियों के लिए राहत की खबर है, वहीं विरोधियों के लिए यह सवालों का विषय बन गया है।


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