नई दिल्ली/- कोरोना काल में गरीबों को मुफ्त में अनाज देने वाली स्कीम, गरीब कल्याण अन्न योजना की अवधि को केंद्र सरकार ने तीन महीने यानी दिसंबर 2022 तक बढ़ा दी है। इस पर 44,700 करोड़ रुपये की लागत आएगी। माना जा रहा है कि बढ़ती महंगाई से गरीबों को कुछ राहत देने के साथ ही गुजरात विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया हैं। यह योजना 30 सितंबर को खत्म होने वाली थी। इस स्कीम से देश के 80 करोड़ लोगों को सीधे फायदा पहुंचता है।
इस योजना के तहत 80 करोड़ गरीबों को पांच किलो गेहूं और चावल हर महीने दिया जाता है। कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये देशव्यापी ‘लॉकडाउन’ से प्रभावित गरीबों को राहत देने के लिये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अप्रैल, 2020 में लाई गई थी। सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कहा कि योजना शुक्रवार को समाप्त हो रही थीं इसे अक्टूबर से दिसंबर, 2022 तक के लिये बढ़ाया गया हैं उन्होंने आगे बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक बैठक में इस योजना को तीन महीने और बढ़ाने का फैसला किया है।
अप्रैल 2020 में शुरू हुई थी स्कीम
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अप्रैल 2020 में कोरोना महामारी के बीच गरीबों की मदद के लिए शुरू की गई थी। ठाकुर ने आगे कहा कि सरकार ने अप्रैल 2020 में पीएमजीकेएवाई स्कीम शुरू होने के बाद से अब तक 3.45 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि इस स्कीम को 3 महीने के लिए बढ़ाने से सरकार पर लगभग 44,762 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। इस तरह, इस स्कीम पर कुल खर्च बढ़कर लगभग 3.91 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एक अक्टूबर से तीन महीने में गरीबों को 122 लाख टन खाद्यान्न मुफ्त दिया जाएगां


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