महाराष्ट्र में क्यों टूटा कांग्रेस का ख्वाब? राहुल गांधी के सारे दावे धरे-के-धरे रह गए

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February 15, 2026

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महाराष्ट्र में क्यों टूटा कांग्रेस का ख्वाब? राहुल गांधी के सारे दावे धरे-के-धरे रह गए

मानसी शर्मा /-  महाराष्ट्र में वोटों की गिनती जारी है। वही्,ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महायुति को पूर्ण बहुमत मिलती हुई दिखाई दे रही है। वहीं,महायुति में भाजपा 125 पर बढ़त बनाए हुए है। दूसरी तरफ महाविकास अघाड़ी के सभी दलों की हालत खस्ता है। बता दें कि महाविकास अघाड़ी 42 सीटों पर आगे चल रहा है। जिसमें कांग्रेस 20 सीटों, शिवसेना (उद्धव गुट) 19 और एनसीपी (अजित पवार) 13 सीटों पर आगे है।

कांग्रेस के दावे को जनता ने किया खारिज

अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिरकार कांग्रेस चुनाव में पिछड़ कैसे गई। महाराष्ट्र चुनाव में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुख खड़गे सहित तमाम दिग्गजों ने कमान संभाल रखी थी। राहुल गांधी के तमाम दावे धरे के धरे रह गए। उन्होंने चुनाव के दौरान संविधान के साथ-साथ आरक्षण के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने कहा था कि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से आगे बढ़ाएंगे। साथ ही उन्होंने जातीय जनगणना की बात की थी। जाहिर सी बात है इस वादे के जरिए वह दलित, आदिवासी, ओबीसी वर्ग को लुभाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन, वह सफल नहीं रहे।

कांग्रेस के पास नहीं है भाजपा की काट

विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए नाक की लड़ाई बन गई थी क्योंकि 10 साल के एंटी इनकम्बेंसी का डर भाजपा को सता रहा था। इसे देखते हुए भाजपा ने पीएम मोदी, अमित शाह समेत तमाम दिग्गजों को चुनाव प्रचार के उतारा दिया था। सबसे बड़ी बात योगी आदित्यनाथ का नारा” बंटेंगे तो कटेंगे” नारा पर जनता ने मुहर लगा दी है। महाराष्ट्र के नतीजों को देखकर कम से कम यह कहा जा सकता है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिरकार कांग्रेस के पास भाजपा का काट क्यों नही है। इसकी सबसे बड़ी वजह बताई जा रही कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी नेताओं का जनता से जुड़ाव नहीं होना। चुनाव के दौरान स्पष्ट देखा जा रहा था कि कांग्रेस के नेताओं में आत्मविश्वास की कमी दिख रही थी।

भाजपा के दो खिलाड़ी ने कर दिया खेला

बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अश्विनी वैष्षण और भूपेद्र यादव को प्रभारी बनाया था। इन दोनों नेताओं ने लगातार महाराष्ट्र में डेरा जमाए रखा और दिन-रात चुनाव प्रचार किया। बता दें कि भूपेद्र यादव को अमित शाह का करीबी नेता बताया जाता है। वह लंबे समय तक बिहार के प्रभारी रहे हैं। इसके अलावा, उनकी पकड़ उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी है। वहीं, अश्विनी वैष्षण पीएम मोदी के खासमखास है। वह केंद्रीय सूचना मंत्री के साथ-साथ रेलवे मंत्री हैं।

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