मानसी शर्मा/- दिवाली के दो दिन बाद भैया दूज का पर्व मनाया जाता है। यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं और उनकी लम्बी उम्र की कामना करती हैं। माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन से तिलक करवाता है, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। इस साल भइया दूज का त्योहार बुधवार, 15 नवंबर को मनाया जाएगा।
भाई के तिलक करने के दो शुभ मुहूर्त
पहला सुबह 6 बजकर 44 मिनट से सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक
दूसरा सुबह 10 बजकर 40 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजे तक
भाई दूज पर पूजा
भाई प्रातःकाल शुद्ध जल से स्नान करें और चन्द्रमा के दर्शन करें
बहनें, भाई के तिलक और आरती के लिए थाल सजाती हैं।
थाली में सिंदूर, चंदन, फल, फूल, मिठाई और सुपारी रखें।
पहले चावल के मिश्रण से एक चौक बनाएं।
चौक पर भाई को बिठाया जाएं और तिलक करें।
फिर फूल, पान, सुपारी, बताशे और काले चने भाई को दें
भाई की आरती उतारें और फिर भाई अपनी बहनों को उपहार भेंट करें
साथ ही सदैव उनकी रक्षा का वचन दें।


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