भारत को विशेष चिंता वाला देश बताने पर भड़के अमेरिकी हिंदू

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
September 7, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

भारत को विशेष चिंता वाला देश बताने पर भड़के अमेरिकी हिंदू

-हिंदू समुदाए ने अमेरिका के कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम की हालिया रिपोर्ट को बताया पक्षपातपूर्ण

वॉशिंगटन/शिव कुमार यादव/- अमेरिका में रहने वाले हिंदू समुदाय ने अमेरिका के कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम की हालिया रिपोर्ट हिन्दू समुदाय भड़क उठा है और उसने इस रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा है कि यह रिपोर्ट गलत तथ्यों के आधार पर और पक्षपातपूर्ण तरीके से बनाई गई है। साथ ही इस बात पर भी नाराजगी जताई कि दुनिया के तीसरे सबसे बड़े हिंदू धर्म का कोई प्रतिनिधि यूएससीआईआरएफ के प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं है। अमेरिका में भारतीयों के एक प्रमुख थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज के पॉलिसी और रणनीति अध्यक्ष खांडेराव कांड ने ये बात कही।

यूएससीआईआरएफ ने शुक्रवार को अपने तीन नए सदस्यों की नियुक्ति का एलान किया। जिसके तहत मौरीन फर्ग्युसन, विकी हार्जलर, आसिफ मोहम्मद को नया सदस्य बनाया गया है, वहीं स्टीफन शेनेक और एरिक येलेंड की फिर से नियुक्ति की गई है। आयोग के पूर्व कमिश्नर अब्राहम कूपर, डेविड करी, फ्रेडरिक डेवी, मोहम्मद मैगिड, नूरी तुर्केल और फ्रैंक वोल्फ का कार्यकाल 14 मई को समाप्त हुआ है। खांडेराव कांड ने कहा कि यूएससीआईआरएफ के नेताओं ने एक बार फिर से वह ऐतिहासिक अवसर गंवा दिया, जिसमें वे आयोग में विविधता को संतुलित करते हुए नियुक्तियां करते। इस दुनिया में हर छह में से एक व्यक्ति हिंदू है, लेकिन आयोग में हिंदू धर्म का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

यूएससीआईआरएफ की सालाना रिपोर्ट भारत के प्रति पक्षपाती है। खांडेराव कांड ने कहा कि रिपोर्ट में कुछ तथ्य हैं, लेकिन यह पूरी सही तस्वीर नहीं दिखाती, इसमें कई तथ्यों को छिपा लिया गया है। यह भारत विरोधी रिपोर्ट है। रिपोर्ट में भारत को विशेष चिंता वाला देश बताया गया है, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत में दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में यूएससीआईआरएफ द्वारा भारत के प्रति ऐसी सिफारिश करना समझ से परे है। भारत का आधार ही विविधता और बहुलतावाद है। खांडेराव ने कहा कि रिपोर्ट में एक धर्म विशेष के मुद्दों पर ही ध्यान दिया गया है। भारत में हिंदू मुस्लिम दंगों का इतिहास रहा है, लेकिन बीते साल भारत में एक भी दंगा नहीं हुआ, लेकिन रिपोर्ट में इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है।
          यूएससीआईआरएफ ने इस महीने की शुरुआत में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 17 देशों को विशेष चिंता वाला देश बताया था। इन देशों पर मानवाधिकारों और धार्मिक आजादी के हनन के आरोप लगाए गए थे। इस लिस्ट में बर्मा, चीन, क्यूबा, एरिट्रिया, ईरान, निकारागुआ, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान के साथ ही अफगानिस्तान, अजरबैजान, भारत, नाइजीरिया और वियतनाम शामिल हैं।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox