नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/भावना शर्मा/- प्राकृतिक सौंदर्य को लेकर यूं तो पूरे विश्व में अनेकों जगहें प्रसिद्ध है। लेकिन स्विटजरलैंड को लेकर प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल हर जगह दी जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में ऐसी एक जगह है जिसे मिनी स्विटजरलैंड कहा जाता है। अगर आप अभी तक इससे अनभिज्ञ है तो आईये बताते है कहां है भारत का मिनी स्विटजरलैंड जहां पूरा साल सैलानियों का तांता लगा रहता है।
हिमाचल प्रदेश में स्थित खजियार को भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता हैं, अगर आप अगस्त के लॉन्ग वीकेंड में कहीं घूमने का मन बना रहे हैं, तो इस जगह को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
जब बात विकेंड की हो और उसमें भी 3 से 4 छुट्टियां मिल जाये तो हर कोई खासकर नौकरीपेशा लोग बाहर घुमने का प्लॉन बनाते हैं। अब बात आती है बेस्ट जगह पर जाने की, तो अगर आप एक अच्छी जगह देख रहे हैं, तो भारत में एक स्विट्जरलैंड जैसी जगह है, जिसे ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप इस जगह पर जाने की योजना बना रहे हैं तो चलिए आपको इस बारे में थोड़ी जानकारी देते हैं।

खजियार नाम कैसे पड़ा
समुद्रतल से 1920 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद खज्जियार हरी घास से लदी हुई एक सुन्दर घाटी है, देखने में आपको ऐसी लगेगी जैसे मानों भारत में स्विट्जरलैंड आ गया हो। ठंडी-ठंडी हवाओं के झोंके पर्यटकों के रोम-रोम को आनंदित कर देते हैं। कभी-कभी आप भी सोचते होंगे आखिर इसका नाम खज्जियार कैसे पड़ा, तो बता दें, यहां खज्जी नाग मंदिर का विशेष महत्व है। खज्जी नाग देवता का स्थान होने की वजह से इसका नाम खज्जियार रखा गया है।

खजियार झील के बारे में
हरे-भरे देवदार के जंगलों से घिरी, खजियार झील प्राकृतिक वैभव से घिरी हुई है, जो 1920 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिमाचल प्रदेश में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक, मन और शरीर को पुनर्जीवित करने के लिए इससे परफेक्ट जगह और कोई नहीं हो सकती। खजियार झील का दौरा ज्यादातर स्थानीय लोग और पर्यटकों द्वारा किया जाता है, जो पैराग्लाइडिंग, ज़ोरबिंग और घुड़सवारी करना चाहते हैं, वो यहां सबसे ज्यादा आते हैं।

कालाटोप वन्यजीव अभयारण्य
ये वन्यजीव अभयारण्य 30.69 वर्ग किमी में फैला हुआ है, जिसे खजियार में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत जगहों में गिना जाता है। डलहौजी और खजियार झील के बीच स्थित, यह वन्यजीव अभ्यारण्य प्रकृति की सैर और हाइकिंग के लिए काफी ज्यादा फेमस है। वन्यजीव अभयारण्य में ब्लू पाइन, ग्रीन ओक और रोडोडेंड्रोन जैसे पेड़ शामिल हैं, और इसके अंदर आपको गोरल, हिमालयन ब्लैक मार्टन, लंगूर, सियार, भालू और तेंदुओं को भी देख सकते हैं। यहां रावी नदी की भी छोटी-छोटी सहायक नदियां हैं, जो यहां की खूबसूरती और भी ज्यादा बड़ा देती हैं।
पंच पांडव पेड़
खजियार झील के आसपास घने देवदार के जंगलों के अंदर पांच पांडव पेड़ है जो खजियार में देखने के लिए सबसे अनोखी जगहों में से एक है। इस पेड़ में 6 अंकुर हैं और स्थानीय लोगों का मानना है कि ये 5 पांडवों और द्रौपदी का प्रतिनिधित्व करते हैं। खजियार से डलहौजी की ओर लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर, एक विशाल देवदार का पेड़ है जिसमें समान ऊंचाई के लगभग 15 अंकुर हैं। खजियार आएं तो इस जगह पर भी जरूर घूमें।

ठहरने की क्या है व्यवस्था
खजियार में रात में ठहरने के लिए काफी सुविधा है, यहां लोक निर्माण विभाग व वन विभाग के विश्राम घरों के साथ, पर्यटन निगम के होटलों के साथ कई छोटे-बड़े होटल और होम स्टे मौजूद हैं। यहां बहुत ही सही दाम में आपको ठहरने के लिए होटल मिल जाएंगे। (चीवजव बतमकपजःतिममचपा.बवउ)
कैसे पहुंचे खजियार
हवाई मार्ग सेः खजियार का अपना कोई हवाई अड्डा नहीं है। पास का हवाई अड्डा कांगड़ा हवाई अड्डा है जो खजियार से करीबन 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
ट्रेन द्वाराः खजियार का पास का रेलवे स्टेशन पंजाब पठानकोट में है। खजियार के पास नूरपुर रोड नामक एक छोटा रेलवे स्टेशन भी है। अगर आप दिल्ली से जा रहे हैं, तो ट्रेन से आपको खजियार पहुंचने में लगभग 10 घंटे लगेंगे।
सड़क मार्ग द्वाराः खजियार डलहौजी और चंबा शहर से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी से जुड़ा हुआ है। आप चंबा, डलहौजी या किसी भी उत्तर भारतीय राज्य से टैक्सी या स्थानीय बस सेवाओं के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं।


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