भगवान हरिहर की अनसुनी कहानी, शैव-वैष्णवों के बीच क्यों है उनकी इतनी गहरी मान्यता?

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 2, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

भगवान हरिहर की अनसुनी कहानी, शैव-वैष्णवों के बीच क्यों है उनकी इतनी गहरी मान्यता?

मानसी शर्मा /- संभल जिले के जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा फैल गई। यह सर्वे एक याचिका के आधार पर किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि जामा मस्जिद का निर्माण प्राचीन श्री हरिहर मंदिर के स्थल पर हुआ था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बाबर ने इस मंदिर को नष्ट कर यहां मस्जिद बनवायी थी। अदालत ने इस मामले में सर्वे की अनुमति दी, हालांकि जामा मस्जिद एक संरक्षित स्मारक के रूप में घोषित है।

भगवान हरिहर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

भगवान हरिहर का नाम भगवान विष्णु और शिव के संयुक्त रूप में लिया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान हरिहर वह रूप है जिसमें भगवान शिव और भगवान विष्णु आधे-आधे शरीर में दिखते हैं। भगवान शिव विनाश के देवता हैं, जबकि विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं। हरिहर रूप में यह दोनों देवता एक साथ दर्शाए जाते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि सृष्टि का संहार और संरक्षण दोनों ही आवश्यक हैं।

ऐतिहासिक रूप से, भगवान शिव और विष्णु के अनुयायियों के बीच यह विवाद हुआ था कि कौन श्रेष्ठ है। इस विवाद को शांत करने के लिए भगवान शिव ने हरिहर रूप धारण किया, जिसमें आधा शरीर शिव का और आधा विष्णु का था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि दोनों देवताओं में कोई भेद नहीं है और उनके अनुयायी आपस में विवाद नहीं करें।

विशेष रूप से कहां-कहां होती है भगवान हरिहर की पूजा

हरिहर की पूजा उन स्थानों पर विशेष रूप से की जाती है, जहां शैव और वैष्णवों का संगम हुआ हो। बिहार के सोनपुर में स्थित हरिहर क्षेत्र एक प्रमुख स्थल है, जहां हरिहर मंदिर है। इसके अलावा, झारखंड के गिरिडीह में भी हरिहर धाम स्थित है, जो अपनी 20फीट ऊंची शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। इन स्थानों पर हरिहर रूप में शिव और विष्णु की संयुक्त पूजा की जाती है।

भगवान हरिहर का रूप न केवल धार्मिक प्रतीक है, बल्कि समाज में शांति और सामंजस्य का संदेश भी देता है। यह रूप यह बताता है कि दोनों शक्तियों में कोई विवाद नहीं होना चाहिए, और हमें एकता और समरसता के साथ रहना चाहिए।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox