ब्रिटेन में ‘सहायता मृत्यु विधेयक’ को मिली स्वीकृति, वयस्कों को मौत चुनने का मिलेगा अधिकार

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ब्रिटेन में ‘सहायता मृत्यु विधेयक’ को मिली स्वीकृति, वयस्कों को मौत चुनने का मिलेगा अधिकार

अनीशा चौहान/-  ब्रिटेन के निचले सदन, हाउस ऑफ कॉमन्स में एक महत्वपूर्ण विधेयक पर बहस और स्वीकृति दी गई है, जिसे ‘सहायता मृत्यु विधेयक’ या ‘मरने का अधिकार’ बिल कहा जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य इंग्लैंड और वेल्स में उन वयस्कों को वैध तरीके से सहायता प्राप्त मृत्यु का विकल्प प्रदान करना है, जिन्हें लाइलाज बीमारी के कारण छह महीने से कम का समय जीवित रहने का अनुमान है।

विधेयक का उद्देश्य और सुरक्षा उपाय

प्रस्तावित कानून के तहत, मरीजों को सख्त सुरक्षा उपायों के साथ अपने जीवन को समाप्त करने का विकल्प दिया जाएगा। इसमें दो डॉक्टरों की सहमति और एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा मामलों की समीक्षा की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज पूरी तरह से समझदारी से इस फैसले को ले रहे हैं और उनकी स्थिति जीवन के अंत के लिए उपयुक्त है।

यह विधेयक उन लोगों के लिए एक विकल्प पेश करता है, जो गंभीर और लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे हैं, और जिनके लिए चिकित्सा उपचार अब कोई प्रभाव नहीं डाल रहा है। इस विधेयक के लागू होने के बाद, इन व्यक्तियों को अपने जीवन को समाप्त करने की अनुमति मिल सकती है, बशर्ते कि उनके मामले को चिकित्सकीय और कानूनी जांच से गुजरना पड़ेगा।

समाज में प्रतिक्रिया और आलोचना

इस विधेयक को लेकर ब्रिटेन में व्यापक बहस हो रही है। एक ओर जहां कुछ लोग इसे मरीजों के अधिकारों और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे जीवन के मूल्य को कम करने वाला मानते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह विधेयक समाज में “सहायता प्राप्त आत्महत्या” को बढ़ावा दे सकता है और कमजोर वर्गों पर दबाव डाल सकता है, जिससे वे अपने जीवन को समाप्त करने का विकल्प चुन सकते हैं।

विश्व भर में ऐसे कानूनों की स्थिति

ब्रिटेन में इस प्रकार के विधेयक का प्रस्ताव दुनिया भर में अन्य देशों द्वारा अपनाए गए समान विधायकों के प्रभाव को देखते हुए किया गया है। कुछ देशों में, जैसे कि नीदरलैंड्स, बेल्जियम, और कनाडा में इस तरह के कानून पहले से मौजूद हैं, जिनके तहत गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति सहायता प्राप्त मृत्यु का विकल्प चुन सकते हैं।

ब्रिटेन में यह विधेयक एक बड़ा बदलाव लाने की संभावना रखता है, जिसमें जीवन और मृत्यु के अधिकार को लेकर पारंपरिक विचारों को चुनौती दी जा रही है। यह विधेयक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, जो भविष्य में अन्य देशों में भी लागू हो सकता है।

हालांकि, अब यह देखना बाकी है कि यह विधेयक अंतिम रूप से कब लागू होता है और इसके लागू होने से पहले और कौन सी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

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