बेअदबी रोकने के लिए सरकार का बड़ा फैसला: अब यूनिक ID के साथ छपेंगे श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 15, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

बेअदबी रोकने के लिए सरकार का बड़ा फैसला: अब यूनिक ID के साथ छपेंगे श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप

पंजाब/उमा सक्सेना/-  पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब के हर स्वरूप को एक विशेष यूनिक आईडी नंबर के साथ प्रकाशित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत हर स्वरूप की अलग पहचान होगी, जिससे उसके प्रकाशन, भंडारण, वितरण और वर्तमान स्थान की जानकारी आसानी से पता की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से भविष्य में होने वाली बेअदबी की घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लगेगी और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचा जा सकेगा।

संशोधन विधेयक 2026 के तहत लागू हुए नए नियम
पंजाब सरकार ने हाल ही में ‘दि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ लागू किया है। इसी विधेयक के तहत अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की छपाई और वितरण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को ही स्वरूपों की छपाई का अधिकार होगा। इसके अलावा जो व्यक्ति या संस्था स्वरूप प्राप्त करेगी, उसे भी तय नियमों और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य होगा।

हर स्वरूप पर होगी डिजिटल पहचान
नई व्यवस्था के अनुसार हर स्वरूप पर एक यूनिक आईडी अंकित होगी, जिसे डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इस यूनिक नंबर के जरिए यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि स्वरूप कब प्रकाशित हुआ, कहां भेजा गया और वर्तमान में किस स्थान पर रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे किसी भी स्वरूप के गायब होने, गलत तरीके से इस्तेमाल होने या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत जांच की जा सकेगी।

एसजीपीसी रखेगी पूरा डिजिटल रिकॉर्ड
संशोधन अधिनियम की धारा 3 ए (1) के अनुसार एसजीपीसी को एक केंद्रीय रजिस्टर तैयार करना होगा। इस रजिस्टर में प्रत्येक स्वरूप से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें स्वरूप की यूनिक आईडी, प्रकाशन की तारीख, उसे किसे दिया गया, किस स्थान पर रखा गया और उसका संरक्षक कौन है—इन सभी बातों का उल्लेख होगा। रिकॉर्ड केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसे डिजिटल रूप में भी सुरक्षित रखा जाएगा।

इसके अलावा एसजीपीसी को यह रिकॉर्ड अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करना होगा। कानून के अनुसार संशोधन लागू होने के 45 दिनों के भीतर यह जानकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इसके बाद हर महीने रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा ताकि किसी भी समय संबंधित जानकारी उपलब्ध रहे। इसके लिए एक अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति भी की जाएगी, जो इस पूरे रिकॉर्ड की निगरानी करेगा।

स्वरूप लेने वालों की जिम्मेदारी भी तय
सरकार ने केवल एसजीपीसी ही नहीं, बल्कि स्वरूप प्राप्त करने वाले लोगों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी है। धारा 3 बी (1) के तहत यह अनिवार्य होगा कि जिस व्यक्ति या संस्था के पास स्वरूप है, वह उसे पूरी धार्मिक मर्यादा और सम्मान के साथ सुरक्षित रखे। यदि किसी कारण से स्वरूप को नुकसान पहुंचता है, वह गुम हो जाता है या उसके साथ किसी प्रकार की बेअदबी होती है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस और संबंधित प्राधिकरण को देनी होगी।

पहले हो चुकी हैं कई बड़ी घटनाएं
पंजाब में बीते वर्षों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ी कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बरगाड़ी, बहबलकलां और नकोदार जैसे मामलों ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। कई जगहों पर स्वरूपों के अंग फाड़े गए, कुछ मामलों में उन्हें जलाने की कोशिश की गई, जबकि कुछ स्थानों पर पवित्र अंग सड़क पर बिखरे मिले। इसके अलावा 328 स्वरूपों के लापता होने का मामला भी लंबे समय तक चर्चा में रहा।

इन घटनाओं के बाद लगातार यह मांग उठ रही थी कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की छपाई और वितरण पर सख्त निगरानी होनी चाहिए। अब सरकार के इस नए कदम को उसी दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।

सरकार को क्यों है इस फैसले से उम्मीद?
सरकार और एसजीपीसी का मानना है कि यूनिक आईडी और डिजिटल ट्रैकिंग की व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी स्वरूप की पूरी जानकारी तुरंत सामने आ जाएगी। इससे बेअदबी की घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और अगर कोई घटना होती भी है तो दोषियों तक पहुंचना आसान होगा। धार्मिक ग्रंथों की गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा के लिए इस व्यवस्था को बेहद अहम माना जा रहा है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox