
नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- उत्तर प्रदेश के बदायूं में स्थित शम्सी जामा मस्जिद और नीलकंठ महादेव मंदिर के विवाद ने एक नया मोड़ लिया है। यह मामला आज कोर्ट में सुनवाई के लिए पेश होने जा रहा है। हिन्दू पक्ष ने आरोप लगाया है कि शम्सी जामा मस्जिद पहले भगवान शिव के मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर के ऊपर बनाई गई थी।
यह विवाद पहली बार 2022 में अदालत में प्रस्तुत किया गया था। हिन्दू पक्ष का कहना है कि इस्लामिक आक्रांताओं के भारत आने से पहले यह स्थान एक प्रमुख शिव मंदिर था, जिसका नाम नीलकंठ मंदिर था। इस मंदिर को तोड़कर इस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। हिन्दू पक्ष ने इस मामले में पूजा के अधिकार की मांग की है और साथ ही यह भी दावा किया है कि मस्जिद के ASI द्वारा सर्वेक्षण की आवश्यकता है, ताकि यह साबित हो सके कि यहाँ पहले शिव मंदिर था।
इस विवाद के बाद, कोर्ट में सुनवाई 4 अक्टूबर को हुई थी, जब जिला अदालत ने यह तय किया था कि इस मामले की आगे सुनवाई योग्य है या नहीं। अब, यह मामला फिर से कोर्ट में पहुंचेगा और यह देखना होगा कि कोर्ट इस विवाद पर क्या निर्णय देता है।
यह विवाद उत्तर प्रदेश के अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद एक और धार्मिक स्थल से जुड़ा हुआ है, जहां हिन्दू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद गहराता जा रहा है। यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक और धार्मिक उथल-पुथल का कारण बन सकता है।





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