काठमांडू/अनीशा चौहान/- नेपाल की राजधानी काठमांडू में भड़के हिंसक प्रदर्शनों ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। ‘जनरेशन ज़ेड’ (Gen-Z) आंदोलन के बैनर तले भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं का गुस्सा इस कदर भड़का कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा।

पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी की मौत
प्रदर्शनों के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल के निवास पर भी हमला हुआ। आंदोलनकारियों ने घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी, जिसमें उनकी पत्नी राजयलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से झुलस गईं। उन्हें कीर्तिपुर बर्न अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने देशभर को हिला कर रख दिया।

संसद भवन और नेताओं के घरों पर हमला
सोमवार से शुरू हुए प्रदर्शनों का दूसरा दिन मंगलवार और भी उग्र रहा। हजारों युवाओं ने संसद भवन पर धावा बोलकर उसे आग के हवाले कर दिया। भीड़ ने ओली के भक्तपुर स्थित घर, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के निवास, पूर्व प्रधानमंत्रियों शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंड’ के घरों समेत कई नेताओं के आवासों पर हमला किया। देउबा और उनकी पत्नी, विदेश मंत्री अर्जु राणा देउबा, इस हिंसा में घायल हो गए। संचार मंत्री प्रिथ्वी सुभ्बा गुरुङ और अन्य मंत्रियों के घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। यहां तक कि संसद, नेपाली कांग्रेस का केंद्रीय कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट तक को नहीं बख्शा गया।
कैसे भड़का Gen Z आंदोलन?
दरअसल, ओली सरकार ने हाल ही में फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर सही ठहराया, लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताया। सोमवार को संसद घेराव के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक घायल हुए। इसी के बाद हालात नियंत्रण से बाहर चले गए।
इस्तीफ़ा और राजनीतिक संकट
लगातार बढ़ते जनविरोध और हिंसा के बीच प्रधानमंत्री ओली ने मंगलवार दोपहर इस्तीफ़ा दे दिया। उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक समाधान का रास्ता साफ कर रहे हैं। वहीं, घरेलू गृहमंत्री रमेश लेखक और कृषि मंत्री राम नाथ अधिकारी ने भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया। कर्फ्यू लागू होने के बावजूद सड़कों पर प्रदर्शन जारी हैं। सेना और प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन फिलहाल नेपाल गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा है।


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