कथित तस्करी मामले में गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन बरी

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August 16, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-  दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 12 वर्षीय बच्ची की कथित तस्करी से जुड़े मामले में गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन की दोषसिद्धि और 24 साल की सजा को रद्द कर दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जिसके चलते आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

सह-आरोपी को भी मिली राहत
इसी मामले में सह-आरोपी संदीप बेदवाल को भी बड़ी राहत मिली है, जिसे पहले निचली अदालत द्वारा 20 साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष के दावों में कई गंभीर कमियां पाई गईं, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।

पीड़िता की गवाही पर उठे सवाल
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पीड़िता की गवाही में कई तरह के विरोधाभास, बदलाव और असंगतियां सामने आईं। न्यायालय के अनुसार, इन परिस्थितियों में गवाही पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता के व्यवहार और बयान में अंतर होने के कारण उसके कथनों पर संदेह उत्पन्न होता है।

अभियोजन पक्ष की कहानी कमजोर पाई गई
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी में कई खामियां थीं। स्वतंत्र साक्ष्यों की कमी और ठोस पुष्टि के अभाव में केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर दोषसिद्धि को कायम रखना न्यायसंगत नहीं है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निचली अदालत ने अपर्याप्त और असंतोषजनक साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया था, जो टिकाऊ नहीं है।

न्यायिक प्रक्रिया पर अहम संकेत
इस फैसले के साथ हाईकोर्ट ने यह संदेश दिया है कि किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य होना अत्यंत आवश्यक है। संदेह की स्थिति में आरोपी को लाभ मिलना न्यायिक सिद्धांत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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