नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- नेपाल में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों और राजनीतिक उठापटक के बाद धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होती दिखाई दे रही है। शनिवार को अधिकारियों ने काठमांडू घाटी समेत कई इलाकों से कर्फ्यू और धारा 144 हटाने की घोषणा कर दी। नेपाल सेना ने भी पुष्टि की कि अब किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं रहेगी। इससे लोगों की दिनचर्या सामान्य होती दिख रही है।

संसद भंग और नई सरकार का गठन
राजनीतिक घटनाक्रम तब तेजी से बदला जब राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने एक ही पत्र जारी कर संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त करने का ऐलान कर दिया। यह नेपाल की राजनीति में अभूतपूर्व कदम माना जा रहा है। कार्की को छह महीने के भीतर आम चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। शपथ के बाद उन्होंने पांच मार्च 2026 को आम चुनाव की तारीख भी घोषित कर दी।
पीएम मोदी ने दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा— “नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री का पदभार संभालने पर सुशीला कार्की को हार्दिक शुभकामनाएँ। भारत, नेपाल के भाइयों-बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।”

कैबिनेट विस्तार पर निगाहें
फिलहाल कार्की ने सभी मंत्रालय अपने पास रखे हैं, लेकिन शनिवार को कैबिनेट विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। चर्चा है कि उनकी टीम में ऊर्जा क्षेत्र के पूर्व सीईओ कुलमन घीसिंग, काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह ‘बालेन’ और पूर्व शिक्षा मंत्री सुमाना श्रेष्ठ को शामिल किया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि पीएम पद की दौड़ में घीसिंग और बालेन का नाम भी प्रमुखता से सामने आया था।
पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर रचा इतिहास
पूर्व मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं। आठ वर्ष पूर्व न्यायपालिका से अवकाश लेने के बाद वह अब कार्यपालिका की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। विराटनगर से कानूनी करियर शुरू करने वाली कार्की ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया था। इससे पहले भी उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह भारतीय नेताओं, खासकर पीएम मोदी से काफी प्रभावित हैं।
चुनौतियों से घिरी नई सरकार
कार्की के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश में अमन और कानून-व्यवस्था बहाल करना है। प्रदर्शनों के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके साथ ही, उन्हें जेन-जी आंदोलनकारियों और मौजूदा राजनीतिक नेताओं के बीच संतुलन बनाते हुए कैबिनेट तैयार करनी होगी। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना, भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और सेना का भरोसा बनाए रखना भी बड़ी कसौटियाँ होंगी। साथ ही, भारत और चीन जैसे पड़ोसियों के साथ संबंधों को स्थिर बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।
शपथ से पहले रखी थी शर्तें
शुक्रवार को शपथ ग्रहण से पहले कार्की ने साफ कर दिया था कि वह तभी यह जिम्मेदारी लेंगी जब उन्हें भ्रष्टाचार और पुलिस बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच करने की अनुमति मिलेगी। उन्होंने कहा था कि अगर उनके हाथ-पांव बाँध दिए जाएंगे तो वह इस पद को स्वीकार नहीं करेंगी। अंततः उनकी शर्तों को मानकर ही राष्ट्रपति और राजनीतिक दलों ने उन्हें अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा।

प्रदर्शन में अब तक 51 की मौत
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता विनोद घिमिरे ने जानकारी दी कि हालिया प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या 51 तक पहुँच गई है। इनमें काठमांडू घाटी के अलावा अन्य जिलों के लोग शामिल हैं। मरने वालों में तीन पुलिसकर्मी और एक भारतीय महिला भी है। पहले ही दिन की हिंसा में 21 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें नौ कैदी और पाँच नाबालिग शामिल थे। आगजनी के बाद मिले जले हुए चार मानव कंकालों ने हालात को और भयावह बना दिया।
आगे का रास्ता
राजनीतिक अस्थिरता के लंबे दौर के बाद नेपाल में अब उम्मीदें कार्की की अंतरिम सरकार से जुड़ी हैं। जनता चाहती है कि पारदर्शी चुनाव हों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगे। हालांकि, सेना प्रमुख अशोकराज सिगडेल की सलाह पर आपातकाल लगाने जैसे विकल्प भी कैबिनेट की पहली बैठक में चर्चा का विषय बन सकते हैं। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि नेपाल का लोकतंत्र किस दिशा में आगे बढ़ता है।


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