निलंबन के बाद कविता की बगावत, एमएलसी पद से इस्तीफा

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January 19, 2026

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निलंबन के बाद कविता की बगावत, एमएलसी पद से इस्तीफा

-तेलंगाना राजनीति में हुई हलचल

तेलंगाना/सिमरन मोरया/- तेलंगाना की राजनीति में हाल ही में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) की वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) के. कविता ने अपने पिता और पार्टी अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उन्होंने तेलंगाना विधान परिषद की सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया। यह कदम BRS द्वारा उन्हें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’के आरोप में निलंबित किए जाने के एक दिन बाद आया, जिसने तेलंगाना के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 02 सितंबर को बीआरएस ने के. कविता को पार्टी से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पार्टी ने उनके हाल के व्यवहार और बयानों को ‘पार्टी विरोधी’करार देते हुए कहा कि यह पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है। निलंबन का फैसला केसीआर ने लिया, जिसे पार्टी के महासचिव टी. रविंदर राव और अनुशासन समिति के प्रभारी सोमा भारत कुमार ने सार्वजनिक किया।

कविता ने निलंबन के अगले दिन 03 सितंबर को हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने कहा ‘मैं एमएलसी पद और बीआरएस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रही हूं। मैं अपना इस्तीफा विधान परिषद के स्पीकर और केसीआर को भेज रही हूं।’उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ साजिश रची और उनके पिता पर दबाव डाला कि उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाए।

कविता ने लगाए आरोप
मालूम हो कि के. कविता ने अपने चचेरे भाइयों, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव और पूर्व राज्यसभा सांसद जे. संतोष कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं ने कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में अनियमितताओं के लिए केसीआर के नाम को बदनाम किया और अपनी संपत्ति बढ़ाई। कविता ने कहा ‘कुछ लोग, जो मेरे पिता के करीब हैं, उनके नाम का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं। हरीश राव और संतोष ने कालेश्वरम परियोजना में अनियमितताएं कीं, जिसके कारण मेरे पिता पर सीबीआई जांच का दबाव है।’

कविता ने अपने भाई और बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) से भी भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि जब उनके खिलाफ ‘दुर्भावनापूर्ण अभियान’चलाया गया, तब केटीआर ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने केटीआर से हरीश राव और संतोष के षड्यंत्रों से सावधान रहने को कहा।

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