नागपुर में चल रहा धर्मांतरण का खेल, बिहार व झारखंड के आदिवासी निशाने पर

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 15, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नागपुर में चल रहा धर्मांतरण का खेल, बिहार व झारखंड के आदिवासी निशाने पर

-ईसाई बनाने को बिहार से भेजी जा रही लड़कियां, 12 आदिवासी लड़कियों को छुड़ाया

नागपुर/- बिहार और झारखंड के पहाड़ी इलाकों से लड़के-लड़कियों को लोभ-लालच में लेकर धर्मांतरण करके ईसाई बनाने के लिए नागपुर भेजने वाला एक गैंग रोहतास जिले में पकड़ा गया है। बच्चों की मदद करने वाली संस्था चाइल्डलाइन नाम की एनजीओ ने 12 आदिवासी लड़कियों को गैंग के हैंडलर के साथ खोज निकाला लेकिन दो-दो थानों की पुलिस ने इन सबको रात भर रखने तक से मना कर दिया। जिले के तिलोथु में चाइल्डलाइन का एक सेंटर है।
              चाइल्डलाइन सब सेंटर की निदेशक सविता डे ने कहा कि रोहतास थाने के तहत पीपराडीह गांव में एक घर से 8 नाबालिग समेत कुल 12 आदिवासी लड़कियों को छुड़ाया। इनके साथ झारखंड के रहने वाले बिचौलिया को भी पकड़ा गया है। सविता डे के मुताबिक गढ़वा जिले के बिचौलिया राम बरन उरांव ने उनको बताया कि रेहल, हरैया, कोरियारी, नागा टोली और कपरफुट्टी समेत अन्य गांवों की 59 आदिवासी लड़कियों को ट्रेन से सोमवार को ही नागपुर भेजा गया है। इन 12 लड़कियों को मंगलवार को नागपुर भेजना था जिन्हें बचा लिया गया है। इन लड़कियों में सात की उम्र 14 से 16 साल है।
             सविता डे ने बताया कि बिचौलिया उरांव के मुताबिक गरीब आदिवासी परिवारों को भरोसा दिया गया था कि उनकी बच्चियों को मुफ्त में अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ाया जाएगा और कम्य्यूटर के साथ-साथ रोजगार की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। ये लड़कियां बिचौलिया नागपुर में अपने बॉस के पास भेजता था जो 18 महीने तक इन सबका मोटिवेशन कोर्स में ब्रेनवाश करने के बाद उनको क्रिश्चन धर्म अपनाने के लिए राजी कर लेता। उरांव ने अपने बॉस का नाम नहीं बताया है जो नागपुर में धर्मांतरण का स्कूल चला रहा है। इन लड़कियों को भेजने का इंतजाम कपरफुट्टी गांव की ही संगीता उरांव ने किया था जो धर्मांतरण कर चुकी है।
               डे ने बताया कि उनको सोमवार की शाम खबर लगी कि डेहरी स्टेशन से इन लड़कियों को भेजा जाएगा। स्टेशन जाने पर सविता डे को एक लड़की मिली जिसने बताया कि 50 से ज्यादा लड़कियां ट्रेन से निकल चुकी हैं और 12 लड़कियां रखी गई हैं जिनको भेजा जाना है। फिर रोहतास थाने की पुलिस को लेकर सविता डे और पुलिस ने लड़की के बताए ठिकाने पर छापा मारकर बाकी 12 लड़कियों को छुड़ाया।
               डे ने कहा कि रोहतास थाना पुलिस ने इन सबको रात भर थाने पर रखने से मना कर दिया। इसके बाद डे सबको लेकर तिलोथु थाना गईं लेकिन वहां भी सबको रखने से मना कर दिया गया। फिर देर रात डे अपने दफ्तर पहुंचीं और वहीं 8 नाबालिग बच्चियों को जिला प्रशासन की बाल कल्याण समिति को सौंप दिया। बाकी लड़कियों को उनके घर वापस भेज दिया गया। डे अब इस मामले में एफआईआर दर्ज करा रही हैं। उन्होंने पुलिस के रवैए पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में इस तरह का असहयोग पुलिस को शोभा नहीं देता है क्योंकि ये किसी के लिए जिंदगी और मौत का सवाल बन सकता है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox