“द्वारका श्री रामलीला सोसायटी में हुआ सुर्पनखा प्रसंग का शानदार मंचन” 

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“द्वारका श्री रामलीला सोसायटी में हुआ सुर्पनखा प्रसंग का शानदार मंचन” 

-सुर्पनखा प्रसंग ने खींचा दर्शकों का ध्यान -रामायण के अहम मोड़ को जीवंत किया मंचन ने     

नई दिल्ली/द्वारका/उमा सक्सेना/-   नवरात्रों के पावन अवसर पर द्वारका श्रीरामलीला सोसायटी द्वारा आयोजित भव्य रामलीला में इस बार कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। खासकर सुर्पनखा के किरदार को निभाने वाले कलाकार ने अपनी अदाकारी और संवाद अदायगी से मंच पर अलग ही छाप छोड़ी।                                                                                                                                                                                      

सुर्पनखा के किरदार का महत्व
रामायण के अनुसार, सुर्पनखा रावण की बहन थी, जिसने वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण से भेंट की। इसी प्रसंग से आगे की रामकथा गति पकड़ती है और यही वह क्षण है जो राम-रावण युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार करता है। ऐसे में रामलीला मंचन में सुर्पनखा का रोल छोटा जरूर है, लेकिन यह पूरी कथा का अहम मोड़ माना जाता है।

कलाकार की दमदार प्रस्तुति
द्वारका सेक्टर-10 की रामलीला में सुर्पनखा की भूमिका निभाने वाले कलाकार ने अपनी अभिव्यक्ति, अभिनय और भाव-भंगिमा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने तालियों और जयकारों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। आयोजन समिति ने भी इस कलाकार की मेहनत और समर्पण की सराहना की।

सोसायटी का भव्य आयोजन
द्वारका श्रीरामलीला सोसायटी हर साल की तरह इस बार भी अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों और आकर्षक मंच सज्जा के लिए चर्चा में रही। मंच सज्जा, संगीत और प्रकाश व्यवस्था ने पूरे आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया।

भक्तों और दर्शकों का उत्साह
रामलीला देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे। सभी ने इस धार्मिक आयोजन को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सराहा और कलाकारों की मेहनत की तारीफ़ की।                                                                                                                                                   

रामायण का निर्णायक मोड़                                                                                           
रामायण की कथा में सुर्पनखा का प्रसंग भले ही छोटा दिखाई देता है, लेकिन यही वह घटना है जिसने पूरी कथा की दिशा बदल दी। सुर्पनखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण ने माता सीता का हरण किया और यहीं से राम-रावण युद्ध का प्रारंभ हुआ। इसीलिए रामलीला मंचन में सुर्पनखा का किरदार विशेष महत्व रखता है। द्वारका की रामलीला में इस प्रसंग को इतनी सुंदरता और गंभीरता से प्रस्तुत किया गया कि श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

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