नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली /शिव कुमार यादव/- यूं तो दिल्ली पुलिस में जाबांज अधिकारियों व कर्मचारियों की कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ ही जांच व कार्यवाही क्यों बैठा दी जाती है। जो अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होते है उनके खिलाफ कार्यवाही करने में बरसों लग जाते है। फिर भी हम बात कर रहे है ।
अभी हाल, ही में द्वारका डीसीपी शंकर चौधरी की जिन्हें पुलिस मुख्यालय ने तुरंत प्रभाव से जिला छोड़कर मुख्यालय में पेश होने का फरमान दिया है। यह सही है कि अगर कोई अधिकारी गलत है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही हो लेकिन जो अधिकारी अपने कामों से दूसरों की आंखों में खटक रहा था और दिल्ली को झोपड़पट्टी बनने से रोक रहे थे उन पर हुई इस तरह की कार्यवाही ने एक बार फिर भ्रष्टाचारियों के हौसलें बुलंद कर दिये है।
खबर यह है कि डीसीपी शंकर चौधरी के हटने की खबर से द्वारका जिला के भू-माफिया व ड्रग्स माफिया में खुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं दूसरी तरफ लोग ऐसे जांबाज अधिकारी के खिलाफ हुई कार्यवाही को लेकर नाखुश दिख रहे है। लोगों का कहना है कि डीसीपी शंकर चौधरी ने अपनी कार्यशैली से अपराधियों में खौफ व आम जन के मन में सुरक्षा की भावना को भरा था। लोगों ने पुलिस उपायुक्त से शंकर चौधरी को एकबार फिर जिला की कमान सौंपने का आग्रह किया है।

गौरतलब है, कि डीसीपी शंकर चौधरी ने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में द्वारका जिला में चल रहा अवैध कालोनियों का धंधा पूरी तरह से बंद करा दिया था। उन्होनें सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिये थे कि उनके क्षेत्र में कोई अवैध कालोनी नही कटेगी। दूसरा द्वारका जिला में बढ़ते ड्रग्स के मामलों पर भी उन्होनें सख्त कार्यवाही की थी।
अकेले मोहन गार्डन, बिंदापुर व उत्तमनगर में विदेशियों के खिलाफ खुलकर कार्यवाही करते हुए हजारों विदेशियों को विदेश भेजने का काम किया था। कुछ समय पहले तक यही विदेशी बगैर किसी खौफ के क्षेत्र में अवैध रूप से रहकर ड्रग्स सप्लाई का काम कर रहे थे। इतना ही नही इन लोगों ने थाने का घेराव कर पुलिस पर भी हमला किया था। जिसके बाद डीसीपी ने इस मामले की कमान संभालते हुए करीब 50 विदेशियों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उन्हे गिरफ्तार किया था।
वही झपटमारी, चेन स्नेचिंग, लूटपाट व चोरी की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए डीसीपी ने पीसीआर व पुलिस की पंहुच का टाईमिंग घटा कर देश में एक रिकार्ड बना दिया था। उन्होने इस तरह के अपराघियों को 72 घंटे में पकड़ने के आदेश भी जारी किये थे। जिसका असर पूरे क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा था और अपराधी अपराध करने से डरने लगे थे। वहीं किसी भी गोली कांड व हत्या जैसी वारदातों में डीसीपी स्वयं मौके पर पंहुचते थे और अपराधियों को पकड़ने के लिए स्वयं टीमों का मार्गदर्शन करते थे।

लोगों का कहना है कि आज ऐसे अधिकारी कहां मिलते है। हजारों में कोई एक आध ऐसा होता है जो जनभावना को समझ सके। डीसीपी शंकर चौधरी ने अपनी कार्यशैली से आम आदमी को अपना मुरीद बना लिया था। पुलिस थानों व विभागों में भी उनका खौफ साफ नजर आता था। लोगों का कहना है कि कही ऐसा तो नही कि डीसीपी को फंसाने के लिए यह काले धंधे करने वाले व भ्रष्टाचारियों की मिली भगत हो। उन्होने पुलिस आयुक्त श्री राकेश अस्थाना से इस मामले दूध का दूध व पानी का पानी करने की अपील की और ऐसे जांबाज अफसर को दौबारा द्वारका जिला में भेजने की अपील की। लोगों ने कहा अभी द्वारका सुधरने लगा था और इस तरह से भ्रष्टाचारियों की चाल कामयाब हो गई तो फिर कोई अधिकारी जनता की परेशानियों को नही समझेगा।


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