देश को मिला नया CJI, सूर्यकांत ने ली हिंदी में शपथ

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ऐतिहासिक शपथ ग्रहण: छह देशों के जज हुए शामिल

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें हिंदी भाषा में शपथ दिलाई, जो समारोह की खास बात रही। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री और गणमान्य अतिथि मौजूद थे।

शपथ के बाद पूर्व CJI ने दिखाई अनोखी परंपरा
शपथ ग्रहण समारोह के बाद देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने एक अनूठी परंपरा स्थापित करते हुए अपने उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति सूर्यकांत के लिए अपनी आधिकारिक कार राष्ट्रपति भवन परिसर में ही छोड़ दी। एएनआई के अनुसार, जस्टिस गवई ने मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहते हुए उन्हें मिली आधिकारिक कार में सफर न करते हुए एक ऐतिहासिक मिसाल पेश की, ताकि नए मुख्य न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट लौटने के लिए वाहन उपलब्ध रहे।

विदेशी न्यायिक प्रतिनिधियों की ऐतिहासिक मौजूदगी
जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में पहली बार छह देशों—भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका—के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज शामिल हुए। यह भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।

महात्मा गांधी को अर्पित की पुष्पांजलि
शपथ ग्रहण के बाद नए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और वहां महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने कोर्ट नंबर 1 में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर के साथ आधिकारिक कार्यवाही शुरू की। कोर्टरूम में मौजूद वकीलों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने जताया विश्वास
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी न्यायमूर्ति सूर्यकांत को बधाई देते हुए कहा कि उनका कार्यभार संभालना न्यायिक व्यवस्था के लिए बेहद निर्णायक समय पर हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व में संवैधानिक मूल्यों और कानून के शासन पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा।

एक गांव से सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष पद तक का सफर
जस्टिस सूर्यकांत का सफर प्रेरणादायक रहा है। 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेट्वर गांव में जन्मे सूर्यकांत ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के स्कूल से पूरी की। इसके बाद गवर्नमेंट पीजी कॉलेज हिसार से स्नातक (1981) और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से एलएलबी (1984) किया।

वकालत की शुरुआत उन्होंने हिसार जिला न्यायालय से की और 1985 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की।

सबसे युवा एडवोकेट जनरल बनने का गौरव
7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल बने और इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा व्यक्ति रहे। इसके बाद 2004 में वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।

5 अक्टूबर 2018 को वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। अब 2027 तक वे देश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएँ देंगे।

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