जीवन का उद्देश्य समाज कल्याण से जुड़ा हो- श्री श्री प्रताप पुरी जी महाराज

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जीवन का उद्देश्य समाज कल्याण से जुड़ा हो- श्री श्री प्रताप पुरी जी महाराज

-कार्यक्रम में करीब 200 विद्वानों, आचार्यों, संन्यासियों व छात्रों ने भाग लिया,

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- अध्यात्म योग संस्थान द्वारका द्वारा भारतीय नव वर्ष विक्रमी संवत 2078 के उपलक्ष में आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 13 अप्रैल को किया गया।  भारतीय नव वर्ष का वैदिक योग विषय पर अनेक विद्वानों, आचार्यों, संन्यासियों, छात्रों ने भाग लिया इस कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का प्रारम्भ मंगलाचरण द्वारा किया गया। मुख्य वक्ता एवं संत सानिध्य के रूप में श्री श्री 1008 प्रताप पुरी जी महाराज, तारातरा मठ, बाड़मेर, राजस्थान रहे। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि यह मानव जीवन सीखने के लिए मिला है, आज मानव कर्तव्य भूलकर अपनी कर्मों की तृप्ति में लगा है। इसलिए कर्तव्य को भूलना नही चाहिए यजुर्वेद का उदाहरण देते हुए कहा सा विद्या या विमुक्तये।
                  कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. महेश प्रसाद सिलोडी, विभागाध्यक्ष योग विज्ञान विभाग,श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली, रहे। उन्होंने कहा आज आदमी संस्कार भूल रहा है और संस्कार मात्र गुरुकुल शिक्षा में ही जीवित हैं। विद्यालयों की शिक्षा में भी इनका शामिल करना चाहिए,। अमेरिका से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय मुख्य अतिथि योगगुरु श्री गिरीश झा ने कहा हमारी संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिन सर्वे संतु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद दुख भागभवेत् की है और वास्तव में वहीं प्राणी सफल है जो ईश्वर के नियमों का पालन करते हुए जीवन पथ पर आगे बढ़ता है। अमेरिका से जुड़े दुसरे विशेष अतिथि डॉ. सोमवीर आर्य ने नव वर्ष के महत्व को बताते हुए कहा कि आज के दिन किसान फसलों के कटाई के बाद खुशी मनाते है, आज प्रक्रति में सब कुछ नया है इसीलिए हमारा नया वर्ष ही सबसे अच्छा हैं। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित- वैदिक प्रवक्ता आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री
                     इन्होंने अपने उद्बोधन में कहा वेदों में सब सत्य विद्याए है, ज्ञान का प्रकाश वहां होता हैं जहां उपनिषद और वेद होते हैं , यज्ञों वै श्रेष्ठतम कर्म अर्थात् हमें जीवन में जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ इत्यादि कार्यक्रमों में यज्ञ करना चाहिए क्युकी यज्ञ के धुएं से वातावर्ण पवित्र होती हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. रमेश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, योग विज्ञान विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली रहे इन्होंने अपने उद्बोधन में कहा सृष्टि विषय भ्रांतियों के निवारण हेतु उदाहरण दिया सृष्टि पर मुर्गी पहले आयी  या अंडा पहले आया इसके निवारण के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती का पक्ष रखते हुए कहा संसार में सबसे पहले जवान प्राणी आए उसके बाद मैथुनी सृष्टि प्रारंभ हुई ।
                    सम्मानित अतिथि डॉ. नवदीप जोशी ने कहा आज व्यक्ति कटाक्ष की भावना में जी रहा है, इसको त्यागकर समत्व की भावना अपनानी चाहिए ।
श्री अनिल कुमार बाल्याण, महासचिव अध्यात्म योग संस्थान कार्यक्रम संयोजक ने बताया कि संस्कारों को भारतीय धर्म एवम् किताबी ज्ञान तक न रखकर जीवनीय पद्धति में भी अपनाना चाहिए, जिस तरह शादी के लिया कुंडली मिलाते हैं उसी तरह शादी के लिए मेडिकल कुंडली भी मिलानी चाहिए। मुख्य अतिथि डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. राजीव रस्तोगी राष्ट्रीय अध्यक्ष अध्यात्म योग संस्थान द्वारका नई दिल्ली इत्यादि आचार्यों के द्वारा कार्यक्रम में नव वर्ष पर सुंदर विचार सुनने को मिले ।
                     कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ धर्मवीर यादव,अध्यक्ष अध्यक्ष योग संस्थान हरियाणा एवं डॉ. जसवीर योगाचार्य,सचिव अध्यात्म योग संस्थान हरियाणा  ने अंत सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया इस कार्यक्रम में पधारे अतिथि, विद्वत जन, छात्र छात्राएं एवम् मातृ शक्ति का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में मंगलाचरण व शांति पाठ  श्री हर्ष शुक्ला और विवेक मिश्रा योग शिक्षक श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने किया।

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