दिल्ली/- दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने अगले साल 6 जनवरी को होने वाली पहली बैठक के लिए अनुमति दे दी है। अब दिल्ली के मेयर के साथ ही डिप्टी मेयर का चुनाव 6 जनवरी 2023 को पहली बैठक में किया जाएगा।
दिल्ली एमसीडी के 250 पर पार्षदों की पहली बैठक 6 जनवरी 2023 को होगी। और इस तरह से अगले 5 साल के लिए दिल्ली नगर निगम का कार्यकाल शुरू होगा। एक अधिकारी ने बताया कि, दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने अगले साल 6 जनवरी को होने वाली पहली बैठक के लिए अनुमति दे दी हैं। दिल्ली के मेयर का चुनाव 6 जनवरी 2023 को किया जाएगा। इस दिन डिप्टी मेयर का भी चुनाव किया जाएगा।
पहली बैठक में क्या होगा?
निगम सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, पहली बैठक में चार काम पूरे किए जाएंगे। इस बैठक में सबसे पहले 250 पार्षदों को शपथ दिलाई जाएगी, मेयर का चुनाव किया जाएगा, उसके बाद डिप्टी मेयर का भी चुनाव किया जाएगा और साथ ही 6 सदस्यीय स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया जाएगा।
नहीं लागू होगा दल बदल कानून
नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि, मेयर का चुनाव गुप्त मतदान प्रणाली के माध्यम से बैलट पेपर द्वारा किया जाएगा और क्रॉस वोटिंग होने पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा।
मेयर का पद पहले साल के लिए महिला आरक्षित
एमसीडी में मेयर कार्यकाल 5 साल का होता है। पहले साल के लिए पद महिला परिषद के लिए आरक्षित है। दिल्ली निगम चुनाव के परिणाम की घोषणा
क्या है नियम?
दिल्ली नगर निगम एक्ट 1957, के अनुसार चुनावों के परिणाम आने के बाद जल्द से जल्द निगम की पहली बैठक हो जानी चाहिए। 12 दिसंबर 2022 को एमसीडी के कमिश्नर ने एमसीडी की पहली बैठक के लिए शहरी विकास विभाग से एलजी की अनुमति लेने को कहा था। शहरी विकास मंत्री मनीष सिसोदिया के फाइल पर अप्रूव करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने भी फाइल को अप्रूव कर दिया और 14 दिसंबर 2022 को फाइल राजनिवास पहुंची और एलजी ने उसी दिन फाइल को अनुमति प्रदान कर दी।
एमसीडी एक्ट के सेक्शन 77 के अनुसार मेयर चुनाव के लिए चुने हुए पार्षदों मी ब1 प्रिंसाइंडिग ऑफिसर नामित किया जाता है। शर्त यह रहती है कि, जो पार्षद प्रिंसाइंडिग ऑफिसर बनाया जा रहा है वह मेयर का चुनाव लड़ रहा हो। ऑफिसर एलजी द्वारा नामित किया जाता है। आने वाले कुछ दिनों में पहली बैठक के लिए प्रिंसाइंडिग ऑफिसर का नामांकन एलजी के पास भेजा जाएगा। चुने हुए पार्षदों में से सबसे वरिष्ठ पार्षद को ही प्रिंसाइंडिग ऑफिसर नियुक्त किया जाता है। एक बार मेयर का चुनाव हो जाने के बाद प्रिंसाइंडिग ऑफिसर का रोल खत्म हो जाता है और मेयर ही सदन का प्रमुख बन जाता है।
कौन कौन कर सकता है वोट? मेयर चुनाव में वोट देने की पात्रता रखने वालों में चुने हुए 250 पार्षद आते हैं। दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों से चुने गए संसद और तीन राज्यसभा संसद भी वोट देने की पात्रता रखते हैं। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष द्वारा निर्मित 13 विद्यायक भी इस चुनाव में हिस्सा ले सकते हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा नामित 10 सदस्य इस चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकते हैं।


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