नई दिल्ली/अनीशा चौहान/- गणेश चतुर्थी का त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि, समृद्धि तथा भाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। हर साल गणेश चतुर्थी के इस खास अवसर पर भक्त गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित कर 5, 7, 9 या 10 दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और 10वें दिन नदी या तालाब में विसर्जित करते हैं।
इको फ्रेंडली गणपति की मूर्ति
आजकल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, और इसी के चलते लोग प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों की जगह मिट्टी या इको फ्रेंडली मूर्तियों को पसंद कर रहे हैं। पीओपी वाली मूर्तियों के विसर्जन से पानी प्रदूषित होता है, जबकि इको फ्रेंडली मूर्तियों से यह समस्या नहीं रहती।
घर पर इको फ्रेंडली गणपति की मूर्ति कैसे बनाएं
1. गोबर से मूर्ति बनाएं
इको फ्रेंडली मूर्ति बनाने के लिए गोबर का उपयोग किया जा सकता है। गोबर में प्लास्टिक या हानिकारक रसायन नहीं होते, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल है।
2. हल्दी से मूर्ति बनाएं
रसोई में उपलब्ध हल्दी का उपयोग भी गणपति की मूर्ति बनाने में किया जा सकता है। हल्दी को पानी डालकर आटे की तरह गूंथ लें और उस पेस्ट से मूर्ति बनाएँ।
3. मैदा या आटे से मूर्ति बनाएं
घर में मौजूद मैदा या आटे से भी गणपति की मूर्ति तैयार की जा सकती है। इनसे गाढ़ा पेस्ट बना लें और मूर्ति का आकार दें।
4. मूर्ति की सजावट करें
इको फ्रेंडली गणपति की मूर्ति की सजावट के लिए साबूदाने, मेवे, चावल, रंग-बिरंगी दालें और ऑर्गेनिक पेंट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मूर्ति बनाने का सही तरीका
इको फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ति बनाने के लिए साधारण मिट्टी, हल्दी या आटे में से किसी एक का चयन करें, पानी डालकर आटे की तरह गूंथ लें। फिर मूर्ति के शरीर, सिर और उंगलियों का आकार बनाएं और कुछ देर सूखने के लिए छोड़ दें। मूर्ति सूखने के बाद उसकी सजावट करें।


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