कृष्ण प्रेम पाने का पावन पर्व है कृष्ण जन्माष्टमी

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कृष्ण प्रेम पाने का पावन पर्व है कृष्ण जन्माष्टमी

–इस्कॉन द्वारका में दो दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव –भगवान को सवा लाख व्यंजनों का भोग अर्पण –कृष्ण के प्रति भक्ति बढ़ाकर पाएँ उनका प्रेम

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज / द्वारका/ शिव कुमार यादव/– इस्कॉन द्वारका में 6 व 7 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव
परम परमेश्वर भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाना अपने आप में जितना हर्षोल्लास से पूर्ण है, उतना ही अद्भुत है इस दिन उनके दिव्य आदिरूप का दर्शन करना। हाथों में बाँसुरी लिए सुंदर मुख वाले और केशों में मोर का पंख धारण किए हुए साँवले रंग की मोहक छवि अधिकांश लोगों को उनका भक्त बनने पर मजबूर कर देती है। अपने प्रेम की डोर से वे हर किसी को बाँध लेते हैं। अतः बहुत सरलता के साथ कृष्ण का चिंतन, दर्शन, प्रणाम व भोग-प्रसाद अर्पण से हर कोई कृष्ण का भक्त बन सकता है। परम शांति का अनुभव कर सकता है। इसी परम शांति को प्रदान करने के लिए इस्कॉन द्वारका दिल्ली श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश मंदिर में 6 व 7 सितंबर को दो दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जा रहा है।

विशेष वाटरप्रूफ पांडाल में होगा लाखों भक्तों का स्वागत
प्रवेश द्वार से लेकर मंदिर प्रांगण की शोभा बढ़ाता हुआ विशेष वाटरप्रूफ पांडाल आपके स्वागत के लिए तैयार हैं। इस बार पाँच लाख से अधिक भक्त भगवान के विशेष दर्शनों का लाभ उठाएँगे जिसकी तैयारियाँ खूब जोरों से चल रही हैं।

आकर्षक ‘सेल्फी प्वाइंट्स
कई ऐसे स्थान जैसे आकर्षक ‘सेल्फी प्वाइंट्स’ भी हैं, जहाँ आपको कृष्ण की बाल-लीलाएँ स्मरण हो आएँगी। अपने पिता के नंद भवन में भगवान कैसे अठखेलियाँ करते थे, कैसे फल वाली को उन्होंने अपने नन्हें हाथों से अनाज के कुछ दाने दिए और बदले में फल तो ले लिए लेकिन उसकी टोकरी रत्नों से भर दीं। थर्मोकोल से बने इस नंद भवन में कृष्ण की बाल-लीलाएँ आपको निश्चित ही मथुरा-वृंदावन ले जाएँगी। आप भी भगवान के आँगन में बैठकर उनका जन्म उत्सव मनाने का आनंद एवं लाभ ले सकते हैं।
इसी तरह एक अन्य ‘कालिया नाग वाला सेल्फी प्वाइंट’ भी आपको कृष्ण लीला का दर्शन कराता प्रतीत होगा। जब भगवान कृष्ण ने कालिया नाग के फनों पर नृत्य किया था, जिसने यमुना नदी के जल को विषाक्त कर दिया था। जब वह श्रीकृष्ण को हरा नहीं पाया तो उसे समझ आया कि वह परम परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ही हैं और उसे उनकी शरण में जाना होगा।
इसी तरह ‘गोवर्धन वाले सेल्फी प्वाइंट’ पर भी आप गोवर्धन उठाने में भगवान का सहयोग कर सकते हैं। इंद्र देव ने जब वृंदावन गाँव में मूसलाधार वर्षा की, क्योंकि कृष्ण ने उसके लिए किए जाने वाले यज्ञ को रोक दिया था तब श्रीकृष्ण ने अपने हाथ की एक अँगुली से गोवर्धन पर्वत उठाकर वृंदावनवासियों की रक्षा की थी और सभी ने इस कार्य में उनकी मदद की थी।
एक अन्य सेल्फी प्वाइंट जिसमें भगवान बंदरों को माखन खिलाते हुए नज़र आएँगे। आप सहसा ही अंदाज़ लगा पाएँगे कि भगवान के बंदर तब फ्रूटी नहीं पीते थे बल्कि माखन चाव से खाते थे। आप भी यहाँ आकर बंदरों को माखन खिलाते हुए सेल्फी ले सकते हैं। इस तरह भगवान की अनेक लीलाओं को याद कर असीम आनंद की प्राप्ति कर सकते हैं।

स्कूली बच्चों की विभिन्न प्रस्तुतियाँ
इस्कॉन द्वारका के विभिन्न स्कूलों एवं गोपाल फन स्कूल (जीएफएस) व इस्कॉन गर्ल्स फोरम (आईजीएफ) एवं इस्कॉन यूथ फोरम (आईवाईएफ) के बच्चों द्वारा जन्माष्टमी से दो दिन पूर्व ही श्लोका गान एवं आध्यात्मिक गीतों पर नृत्य व नृत्य-नाटिकाएँ प्रस्तुत की जाएँगी। कालिया दमन, राधा-कृष्ण लीला, राधा-गोपी नृत्य, अष्ट-सखी नृत्य जैसे प्रसंग इस दिन बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी आकर्षित करते हैं। 6 व 7 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर बेहतर प्रदर्शन के लिए बच्चों को पुरस्कृत किया जाएगा।

सवा लाख भोग अर्पण
इस जन्माष्टमी पर भगवान को सवा लाख भोग अर्पण किए जाएँगे। ड्राई फ्रूट्स से बने सूखे प्रसाद को बनाने की तैयारियाँ तो कई दिन पहले से ही शुरू हो गई हैं। तरह-तरह के लड्डू, पंजीरी एवं मेवा बरफी भोग के लिए बनाई जा रही हैं। जो भोग के बाद भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाएगा। रात 9 बजे भगवान को पांडाल में स्थापित किया जाएगा और 10 बजे दिव्य द्रव्यों से महाअभिषेक किया जाएगा। तत्पश्चात महाआरती होगी। फिर भोग अर्पण एवं रात बजे कृष्ण जन्म के बाद केक कटिंग सेलिब्रेशन होगा और फिर प्रसाद वितरण का कार्यक्रम रहेगा।

सेवा भाव से मनाएँ कृष्ण जन्मोत्सवः अध्यक्ष, इस्कॉन द्वारका
इस्कॉन द्वारका के अध्यक्ष प्रद्युमन प्रिय दास कहते हैं कि, “साल भर भक्त श्रवण, कीर्तन, नृत्य के माध्यम से भगवान की सेवा कर उन्हें प्रसन्न करते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में भगवान के प्राकट्य दिवस पर उनके नवागंतुक भक्तों का स्वागत कर उन्हें प्रसन्न करना चाहिए। भक्तों की सेवा से भगवान बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। चाहे दर्शन करने की आपाधापी हो या प्रसाद पाने की भीड़भाड़, ऐसे में सेवाभाव ही सबसे बड़ा रामबाण है जिससे भक्त और भगवान दोनों को प्रसन्न किया जा सकता है। पुरातन वैवाहिक परंपरा और यहाँ तक आज भी वधू पक्ष जैसे बारातियों का स्वागत करने में तत्पर रहता था, वैसे ही कृष्ण जन्मोत्सव पर हमें भगवान के मेहमानों का गरमजोशी से आदर-सत्कार करना चाहिए। इससे आप भगवान की कृपा दृष्टि और प्रेम दोनों के पात्र बन सकते हैं।”

बच्चों को कराएँ कृष्ण की बाल लीलाओं का ज्ञानः प्रबंधक इस्कॉन द्वारका
मंदिर के प्रमुख प्रबंधक अर्चित प्रभु का कहना है, “साल भर का यह विशेष उत्सव कृष्ण जन्माष्टमी को हम भरपूर उल्लास के साथ मनाते हैं। आप सभी मित्रों एव परिवार के साथ यहाँ आएँ, बच्चों को लाएँ, उनको सेल्फी लेने के बहाने से कृष्ण लीलाओं का ज्ञान कराएँ, ताकि बच्चों के अंदर अपनी वैदिक संस्कृति को जानने की इच्छा जाग्रत हो। वे भक्त रूप में भगवान का दर्शन करें और उनका प्रेम प्राप्त करें।”
समाप्त
वंदना गुप्ता

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