अनीशा चौहान/- कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस का दो दिवसीय अधिवेशन 26 और 27 दिसंबर को होने वाला है, लेकिन इससे पहले ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, कांग्रेस के अधिवेशन के लिए लगाए गए पोस्टरों में भारत का नक्शा गलत तरीके से दर्शाया गया है। इन पोस्टरों में कश्मीर का हिस्सा पूरी तरह से नजर नहीं आ रहा है, जिससे भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है।
भा.ज.पा. का कड़ा रुख
इस विवादित पोस्टर को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत के नक्शे के साथ इस तरह की छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के कृत्य से कांग्रेस का राष्ट्र विरोधी चेहरा सामने आ गया है। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा भारत को तोड़ने का काम किया है। हालांकि, कांग्रेस की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
गलती का एहसास होते ही पोस्टर हटाए गए
बताया जा रहा है कि ये पोस्टर प्रिंटिंग प्रेस की गलती से लगाए गए थे, जिसमें भारत का गलत नक्शा प्रकाशित हो गया था। हालांकि, गलती का एहसास होते ही इन पोस्टरों को तुरंत हटा लिया गया। बावजूद इसके यह विवाद अब भी गरमा गया है और भाजपा इसे कांग्रेस की गलत मानसिकता के रूप में प्रचारित कर रही है।
कांग्रेस का अधिवेशन: क्या होगा एजेंडा?
कर्नाटक के बेलगावी में कांग्रेस वर्किंग कमेटी का अधिवेशन 26 और 27 दिसंबर को आयोजित होने जा रहा है। इस अधिवेशन में हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस की हालिया हार पर चर्चा होगी। इसके साथ ही, कांग्रेस की योजना बीजेपी को घेरने के लिए रणनीति तैयार करने की है। मोदी सरकार की नीतियों से देश में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर चिंतन किया जाएगा और कांग्रेस की कार्ययोजना पर प्रस्ताव पास किया जाएगा। दूसरा प्रस्ताव आंबेडकर विवाद पर होगा, जिससे कांग्रेस संविधान के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरने की कोशिश करेगी।
महात्मा गांधी के अधिवेशन की यादें
इस बार कांग्रेस का अधिवेशन उसी स्थान पर हो रहा है, जहां 1924 में महात्मा गांधी का अधिवेशन हुआ था। यह अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्षणों में से एक माना जाता है। गांधीजी ने इस अधिवेशन के दौरान चरखे पर सूत काटने की अपील की थी और असहयोग आंदोलन का आह्वान किया था, जो बाद में स्वतंत्रता संग्राम का एक बड़ा आंदोलन बन गया। उस अधिवेशन के मुख्य आयोजक गंगाधर राव देशपांडे थे, जिन्हें कर्नाटक का भगीरथ कहा जाता है।


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