लखनऊ/उमा सक्सेना/- लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 13 वर्षीय छात्र यश कुमार ऑनलाइन गेम फ्री फायर की लत में इतना उलझ गया कि उसने पिता के बैंक खाते से करीब 14 लाख रुपये गंवा दिए और अंततः आत्महत्या कर ली। जांच में खुलासा हुआ है कि बिहार के एक गिरोह ने गेम और फर्जी दोस्ती के बहाने उसे अपने जाल में फंसाया था। यश लगातार यूपीआई के जरिए बिहार के छह अलग-अलग खातों में पैसा ट्रांसफर करता रहा। पुलिस ने पता लगाया है कि 400 से ज्यादा बार रकम ट्रांसफर हुई, जिनमें से एक खाता एक युवती के नाम पर है।

मां से छीनने लगा था मोबाइल, खरीदी थी 85 हजार की घड़ी
परिजनों के अनुसार यश फोन के लिए आक्रामक हो चुका था। एक बार तो उसने मां का गला तक दबा दिया था। इसके अलावा अगस्त में उसने 85 हजार रुपये की एप्पल घड़ी खरीदी थी, जिसके पीछे भी गिरोह का दबाव बताया जा रहा है। यश अकसर देर रात किसी से गुपचुप बातें करता था और जब कोई दूसरा फोन उठाता तो वह बातचीत करने से इनकार कर देता। उसकी बहन गुनगुन ने बताया कि वह इंस्टाग्राम पर बने दोस्त से घंटों बात करता था, जो खुद को बिहार का बताता था।

आखिरी बार 51 हजार का ट्रांसफर, फिर मौत को गले लगाया
पुलिस जांच में सामने आया कि आत्महत्या से एक दिन पहले यश ने 51 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। सोमवार को जब उसके पिता बैंक से पैसे निकालने गए तो खाते में रकम गायब मिली। सुरेश यादव ने घर लौटकर परिवार को जानकारी दी, लेकिन यह सुनते ही यश घबरा गया। वह पढ़ाई का बहाना बनाकर कमरे में चला गया और फंदे से लटक गया। देर रात बहन ने जब उसे देखा तो वह मौत के आगोश में जा चुका था।

लालच और धोखे का खेल
यश के दोस्तों ने बताया कि वह अक्सर कहता था कि एक युवक ने उसे गेम में पैसे लगाने पर करोड़ों कमाने का लालच दिया है। पहले सबको यह उसकी कल्पना लगी, लेकिन अब शक गहराता जा रहा है कि बिहार का वही युवक उसे धोखे में रखे था। पुलिस ने मोबाइल फोन कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। कॉल डिटेल्स और री-सेट किए गए डाटा को रिकवर कराया जा रहा है ताकि पूरे गिरोह की सच्चाई सामने लाई जा सके।
राजनीति से लेकर पुलिस तक सक्रिय
यश की मौत ने राजनीतिक हलकों को भी हिला दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पीड़ित परिवार से मिले और सरकार पर ऑनलाइन गेम पर प्रतिबंध लगाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन खेलों ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है, इसलिए सख्त कदम उठाना जरूरी है। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू किया। मोहनलालगंज पुलिस ने मऊ गांव में जाकर कार्यक्रम आयोजित किया और बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग के खतरे समझाए।

फ्री फायर पर सवाल, बैन के बावजूद सक्रिय
फ्री फायर बैटल रॉयल शैली का गेम है जिसमें खिलाड़ी वर्चुअल हथियारों और सामान पर पैसे खर्च करते हैं। सरकार ने इसे 2022 में सुरक्षा कारणों से बैन किया था, लेकिन यह अभी भी अलग-अलग माध्यमों से उपलब्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे गेम बच्चों को न केवल आर्थिक रूप से बरबाद कर रहे हैं, बल्कि मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी घटनाओं को भी जन्म दे रहे हैं।


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