एमस में शुरू हुआ कोवैक्सीन की बूस्टर डोज का ट्रायल

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April 19, 2026

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एमस में शुरू हुआ कोवैक्सीन की बूस्टर डोज का ट्रायल

-हर साल लेना होगा एक शॉट? ट्रायल के परिणामों से होगा बूस्टर का भविष्य तय

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/एम्स/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- दिल्ली के एम्स अस्पताल में कोवैक्सीन की बूस्टर डोज का ट्रायल शुरू हो गया है। कोवैक्सिन निर्माता भारत बायोटेक ने सोमवार से बूस्टर डोज का ट्रायल शुरू कर दिया है। बूस्टर डोज के ट्रायल में उन लोगों को शामिल किया जा रहा है जिन्हें फेज दो के ट्रायल के दौरान दूसरे डोज लिए छह महीने पूरे हो चुके हैं। यानी जिन्हें पिछले साल सितंबर और अक्टूबर के बीच वैक्सीन लगी थी। भारत बायोटेक को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ पैनल से अप्रैल में कोवैक्सीन के तीसरे डोज यानी बूस्टर डोज के लिए क्लिनिकल ट्रायल करने की अनुमति मिली थी। रिसर्च में हुआ खुलासा, फाइजर टीके की दूसरी खुराक में विलंब से बुजु्र्गों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है
                      बता दें कि इससे पहले अमेरिकन वैक्सीन बनाने वाली कंपनी फाइजर और मॉडर्ना ने घोषणा की थी कि जिन लोगों ने फाइजर-बायोएनटेक या मॉडर्ना कोविड-19 वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है, उन्हें इस साल बूस्टर शॉट की आवश्यकता होगी और उसके बाद हर साल अनुअल शॉट की भी जरूरत हो सकती है।
                     एम्स से मिली जानकारी के अनुसार इस ट्रायल का मकसद यह जानना है कि बूस्टर डोज के बाद एंटीबॉडी लेवल में क्या कोई अंतर दिखता है या नहीं? अगर बूस्टर डोज से एंटीबॉडी बनने में बड़ा अंतर आता है तो इस बारे में विचार किया जाएगा, लेकिन अगर कोई विशेष फयादा नहीं हुआ तो ऐसा भी हो सकता है कि बूस्टर की जरूरत ही नहीं हो। लेकिन अब यह ट्रायल पर निर्भर करेगा। इसके लिए एम्स दूसरे फेज में शामिल लगभग 400 में से 200 लोगों को ले रहे हैं। इस 200 को दो ग्रुप में बांटा जाएगा और एक ग्रुप को वैक्सीन की बूस्टर डोज और दूसरे ग्रुप को प्लेसिबो दी जाएगी। इसके बाद दोनों ग्रुप की तलनात्मक स्टडी की जाएगी, जिसके आधार पर यह तय किय जा सकेगा कि बूस्टर डोज से फायदे है या नहीं।

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