एक महिला नशे की हालत में पुरुष मित्र को अनुचित लाभ उठाने का लाइसेंस प्रदान नहीं करती: कोर्ट

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
January 20, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

एक महिला नशे की हालत में पुरुष मित्र को अनुचित लाभ उठाने का लाइसेंस प्रदान नहीं करती: कोर्ट

नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/ नेपाल/ मानसी शर्मा –  साकेत कोर्ट की सत्र अदालत ने कहा कि एक महिला की नशे की हालत उसके पुरुष मित्र को उसकी स्थिति का अनुचित लाभ उठाने का लाइसेंस प्रदान नहीं करती। साथ ही अदालत ने आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा जिसने महिला को चूमने की कोशिश की और जब उसने प्रतिवाद किया तो दोषी ने थप्पड़ मार दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनील गुप्ता भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (किसी महिला का शील भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल) और धारा-323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना)के तहत पांच फरवरी, 2019 को महिला अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के खिलाफ आरोपी संदीप गुप्ता की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई कर रहे थे।

हाल में दिए आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने साबित किया है कि अपीलकर्ता (गुप्ता) ने शिकायतकर्ता के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल किया है। आरोपी ने यह जानते हुए कि वह उसे चूमने की कोशिश करके उसकी गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है तथा स्वेच्छा से उसे थप्पड़ मारकर उसे चोट पहुंचाई । उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 323 के तहत अपराध के लिए उसे उचित तरीके से दोषी ठहराया है।

अदालत ने बचाव पक्ष के वकील की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि चिकित्सकीय साक्ष्य का अभाव है कि पीड़िता को पीटा गया था और पीड़िता ने कथित तौर पर नशे में होने के कारण अपनी चिकित्सीय जांच नहीं कराई थी। फैसले में कहा गया है कि किसी व्यक्ति को मात्र थप्पड़ मारना ही भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत अपराध है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox