नई दिल्ली/सिमरन मोरया/ – महाशिवरात्रि का पर्व हिंदुओं के लिए एक प्रमुख त्यौहार है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है। लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। सनातन धर्म में सभी को महाशिवरात्रि का बहुत ही इंतजार रहता है। इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव का विवाह हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव पार्वती का विवाह महाशिवरात्रि के दिन संपन्न हुआ था। सभी शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बहुत ही उल्लास से भरा हुआ होता है। इस दिन नर-नारी, बच्चे, और कुंवारी लड़कियां सभी महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं।
ध्यान देने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें
महाशिवरात्रि वाले दिन सभी मां पार्वती और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनके अनुसार पूजा करते हैं। लेकिन शिव पार्वती की आराधना करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद ही जरूरी होता है। इस दिन मंदिर में काले कपड़े पहन कर नहीं जाना चाहिए। शिव पर जल अर्पित करते समय ध्यान रहे तेज धारा में जल ना चढ़ाएं बल्कि धीरे-धीरे जल अर्पित करें और साथ ही शिव मंत्र का जाप करते रहें। शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ध्यान रहे सबसे पहले दाएं और जल चढ़ाएं जो गणेश जी का स्थान माना जाता है इससे आपके जीवन में तरक्की के रास्ते खुल जाते हैं।
शिवजी पर धतूरा, बेलपत्र, शहद, दही, दूध, मिठाई, पुष्प, और निम्न प्रकार की दालों के रुद्राभिषेक से आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जिन कन्याओं के विवाह में अड़चन किसी कारणवश संपूर्ण नहीं हो पा रही है तो उस कन्या को महाशिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा भावना से करना चाहिए इससे उसके विवाह में होने वाली अड़चने या दिक्कतें खत्म हो जाती हैं।


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